गेहूं और धान के बीच के समय लगाए यह फसल , एक एकड़ से होगी 35 हजार की फसल

तलवंडी साबो ब्लॉक के अधीन पड़ते गांव गोलेवाला का किसान निर्मल सिंह गेहूं की कटाई करने के बाद सट्‌ठी मूंगी की बिजाई करके अपनी आमदनी में मुनाफा कर रहा है। फसल से होने वाले शानदार मुनाफे को देखते हुए इस साल उसने 10 एकड़ में मूंग फसल की बिजाई की है।

निर्मल सिंह धान व बासमती से पहले सट्‌ठी मूंगी की काश्त करता है, इससे जहां एक अतिरिक्त फसल के जरिए ज्यादा आमदनी होती है, वहीं मूंगी की फसल अपनी जड़ों के प्राकृतिक गुण के कारण जमीन में नाइट्रोजन फिक्सेशन के जरिए जमीन में नाइट्रोजन खाद की मात्रा बढ़ाती है। इस तरह से अगली फसल को कम यूरिया खाद डालने की जरूरत पड़ती है।

जमीन की सेहत में हुआ सुधार

निर्मल सिंह बताया कि फसली चक्कर का हिस्सा बनाने से उसकी जमीन की सेहत में सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि जिस खेत में मूंगी की फसल की बिजाई की जाती है, उस खेत में बासमती धान लगभग 20 जुलाई के बाद ही लगाया जाता है। इससे जहां पानी की बचत होती है, वहीं बिजली की भी बचत होती है तथा यह धान परमल धान जोकि 20 जून को बताया जाता है, के बराबर ही पक कर तैयार हो जाता है।

मुख्य खेतीबाड़ी अफसर डॉ. गुरदित्ता सिंह सिधू ने बताया कि जिले में लगभग 2500 एकड़ से ज्यादा क्षेत्रफल में सट्‌ठी मूंगी की बिजाई करके खेतीबाड़ी विभाग जिले में फसल विभिन्नता को प्रोत्साहित कर रहा है। इससे मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर उसे और उपजाऊ बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि सट्‌ठी मूंगी 60 दिन की फसल जोकि गेहूं व धान की दरम्यान खाली समय में बिजाई की जाती है और किसानों को अच्छा फायदा देती है। इस किस्म का औसतन झाड़ 4 से 5 क्विंटल प्रति एकड़ है। उन्होंने बताया कि सट्‌ठी मूंगी का बीज 10 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से बरता जाता है।

गेहूं काटने के बाद गर्मी के मौसम की मूंगी बिना खेत में हल चलाए ही बिजाई की जा सकती है। अगर खेत में गेहूं का नाड़ नहीं है तो मूंगी जीरो टिल ड्रिल के जरिए बिजाई की जाए। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से किसानों को सट्‌ठी मूंगी के बीज की फ्री आफ कास्ट मिनी किट बांटी जाती हैं। मूंगी की फसल 20 मार्च से अप्रैल के तीसरे सप्ताह तक बिजाई की जाती है।

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