अमरुद और निम्बू की खेती से बदली किस्मत

तराना के एक किसान ने परम्परागत फसलों से आगे बढ़ बागवानी फसलों को अपनाकर खेती में एक सफल उदहारण प्रस्तुत किया है. उन्होंने अमरुद और निम्बू की फसल में पसीना बहाया और उनकी मेहनत रंग लायी और वे बागवानी फसलों से सालाना करीब 5 लाख रूपये कमा रहे है. उनकी इस मेहनत को सार्वजानिक रूप से भी सम्मानित किया जाएगा.

खंडाखेड़ी निवासी हरिशंकर देवड़ा ने सरकार की फल क्षेत्र विस्तार योजना के अंतर्गत उद्यानिकी विभाग से अमरुद और निम्बू के पौधे प्राप्त कर बगीचा लगाया था. उनकी कड़ी मेहनत से मात्र 10 वर्षों में 6 बीघा जमीन से कुल 250 कुंतल अमरुद और 150 कुंतल नीम्बू की बम्पर उपज से उन्हें सालाना 5 लाख रूपये प्राप्त हो रहा है. हरिशंकर देवड़ा को आत्मा योजना के अंतर्गत 26 जनवरी को श्रेष्ठ उद्यानिकी कृषक का पुरूस्कार राशि 10 हजार रूपये कलेक्टर द्वारा दी जाएगी.

हरिशंकर ने बताया पहले परम्परागत खेती में उन्हें सीमित मुनाफा प्राप्त होता था. उस आय से परिवार का भरण पोषण और बच्चों को शिक्षा दिलाने में काफी कठिनाई होती थी. उद्यनिकि विभाग की सलाह से उन्होंने फलोद्यान लगाया और तब उन्हें बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी कि उद्द्यानिकी फसल से वो अपनी आय को इतना बढ़ा सकतें हैं.

देवड़ा के पास कुल 11 बीघा जमीन है जिनमें वो 4 बीघा में अमरुद और 2 बीघा में निम्बू की फसल व बाकी जमीन पर पारम्परिक फसलों को उगाते हैं. लेकिन उद्यानिकी फसल को उगाने के बाद प्राप्त फायदे को देखकर वो उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ने की सोच रहे हैं.

हरिशंकर देवड़ा की बहु संगीता महिलाओं के लिए मिसाल बनी हुई है. संगीता ने कठोर परिश्रम से घर में पशुपालन के माध्यम से दूध का व्यवसाय शुरू किया है. उनके यहाँ 7 भैंसे और 2 गाय है जिनसे उन्हें सुबह और शाम 25-25 लीटर दूध प्राप्त होता है. इसके अलावा गोबर से बनी हुई प्राक्रतिक खाद का उपयोग खेतों में किया जाता है. संगीता ने दूध का व्यवसाय शुरू किया जिसके कारण वो भी आत्मनिर्भर हो गई है.

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