अब धान की जगह पर दूसरी खेती करने वाले किसानो को सरकार देगी इतने रुपये

धान की खेती करने वाले गांवों पर मंडरा रहे पानी के संकट से निपटने के लिए हरयाणा सरकार ने एक योजना बनाई है। किसान धान की खेती ना करें इस लिए सरकार 2000 रुपए प्रति एकड़ की सहायता देगी, इस सहायता के साथ-साथ बीज देने जैसे अन्य फायदे भी किसानों तक पहुंचने की योजना है।

पिछले महीने की 21 तारीख को हरियाणा के मुख्यमंत्री ‘मनोहरलाल खट्टर’ ने चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया था, ‘हरियाणा में गिरते भू जल स्तर को लेकर सरकार चिंतित है। हरियाणा में जो धान की खेती का जो क्रेज बना हुआ है हम उसे डिस्करेज करना चाहते हैं ताकि पानी के स्तर को और गिरने से बचाया जा सके, हरियाणा सरकार पानी के लिए काम कर रही है। इसमें लोगों और किसानों की मदद की भी उम्मीद है।”

बता दें कि हरियाणा के 9 जिले डार्क ज़ोन में हैं और इन जिलों में पानी की स्तर बिलकुल नीचे जा चुका है। यमुनानगर, अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और सोनीपत धान बाहुल्य क्षेत्रों में धान की बजाय अलग विकल्प खोजे जा रहे हैं।

इस सब के बारे में कंडेला गांव के किसान नेता रामफल ने बताया, ‘हम बावले लोग थोड़े हैं. हम भी पानी को लेकर चिंतित हैं। लेकिन सरकार ये बताए कि अभी तक हम किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य बताया है क्या?

सरकार कह रही है कि दो हज़ार रुपए देगी लेकिन बीज के पैसे भी इसी से काटेगी। जिन फसलों को बोने की सरकार बात कर रही है उनके बीजों का मार्केट का दाम ही 2800 के करीब है। हमने अरहर की फसल उगा कर देख ली है, ये फसलें हरियाणा में कामयाब ही नहीं है।”

भूजल को लेकर सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगले 20 से 25 साल में भूजल स्तर खत्म होने की संभावना है। आंकड़ों की मानें तो पंजाब के 82 फीसदी और हरियाणा के 76 फीसदी हिस्से में बहुत तेजी से भूजल स्तर गिरा है। अगर ऐसे ही चलता रहा तो पंजाब, हरियाणा व राजस्थान में भूजल स्तर 300 मीटर तक पहुंचने के आसार हैं।