युवक किसान ने इंटरनेट से सीखी स्ट्रौबेरी की खेती और फिर दिया ऐसा कमाल आप सोच भी नहीं सकते

हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले के डिंगरोता गाँव के किसान अनिल बलोठिया (35 वर्ष) पिछले दो साल स्ट्राबेरी की खेती कर रहे हैं। दो साल पहले हिसार में उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती के बारे में सुना ,बस उन्होंने ने मन मैं ठान ली की अब बस स्ट्रॉबेरी की खेती ही करनी है ।

उसके बाद इंटरनेट से सारी जानकारी इकट्ठा की।और फिर उन्होंने खेती से यही नहीं स्ट्राबेरी के साथ मिर्च की भी खेती सहफसल ऊगा के सिर्फ डेढ़ एकड़ से ही 10 लाख की फसल पैदा की । अभी तक स्ट्रॉबेरी की खेती ठंडे प्रदेशों में की जाती थी, लेकिन लेकिन नवंबर से अप्रैल तक ठण्ड होने के कारण इसकी खेती उत्तर भारत में हो सकती है।

वहां जाकर उन्होंने इसकी खेती शुरु कर दी। किसान अनिल बलोठिया बताते हैं, “दो साल पहले हिसार में एक किसान को स्ट्रॉबेरी की खेती करते देखा था, फिर वहीं से मैंने भी सोच लिया कि अपने गाँव में जाकर स्ट्राबेरी की खेती करूंगा। इंटरनेट की जानकारी लेने के बाद अपने गाँव में खेती शुरु कर दी है।”

महेन्द्रगढ़ के अलावा हिसार जिला धीरे-धीरे स्ट्रॉबेरी का हब बनता जा रहा है। यहां के कई गाँवों में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। यहां के किसानों के लिए दूसरी फसलों के मुकाबले यह फायदे की फसल साबित हो रही है।

खेती में ज्यादा मुनाफा देख दूसरे जिलों के किसान भी यहां पर जमीन ठेके पर लेकर स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। अनिल स्ट्रॉबेरी के साथ ही मिर्च के पौधे भी लगा देते हैं। अनिल बताते हैं, “हम पहले स्ट्रॉबेरी के पौधे लगा देते हैं, जब पौधे पूरी तरह से तैयार हो जाते हैं तो उसी के साथ ही मिर्च के पौधे लगा देते हैं। स्ट्राबेरी आठ महीने की फसल होती है और मिर्च दस महीने की होती है।”

डेढ़ एकड़ स्ट्रॉबेरी की फसल में चार-पांच लाख की लागत आती है। पैदावार होने के बाद खर्च निकालकर सात-आठ लाख का फायदा हो जाता है। वहीं मिर्च से भी दो-तीन लाख की आमदनी हो जाती है। ऐसे में मिर्च और स्ट्राबेरी दोनों को बेचकर दस लाख तक आमदनी हो जाती है।

स्ट्रॉबेरी की फसल खत्म होते होते मिर्च में फल लगने लगते हैं। यहां से तैयार स्ट्रॉबेरी पैक करके दिल्ली भेज देते हैं, जहां से दूसरी जगह से सप्लाई की जाती है। अनिल बताते हैं, “स्ट्रॉबेरी पचास रुपए किलो से लेकर छह सौ रुपए किलो तक बिक जाती है। डेढ़ एकड़ में दो किलो वजन की पचास हजार ट्रे पैदा हो जाती है।”

डेढ़ एकड़ में 35 से 40 हजार पौधे लगते हैं, मिर्च में अलग से कोई खर्च नहीं लगता है। इसके पौधे हिमाचल से लाए जाते हैं, लेकिन अब अनिल नर्सरी यहीं पर तैयार करते हैं। किस्म के हिसाब से प्रति पौधा 10 रुपए से लेकर 30 रुपए तक के बीच पड़ते हैं। रोपाई का काम अक्टूबर-नवंबर में किया जाता है। जनवरी और फरवरी माह में यह तैयार होकर फल दे देती है।