जीरो बजट खेती का कमाल, गेहूं उत्पादन से प्रति एकड हो रहा 46000 रु. का मुनाफा

राजस्थान की सीमा से सटे भिवानी के रेतीले इलाके में अब की बार प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को रसायनिक खेती से कहीं ज्यादा फायदा मिला है। किसानों का कहना है कि अबकी बार उन्हें पुरानी देसी गेहूं की किस्म 306 के उत्पादन में प्रति एकड़ रसायनिक फसल के मुकाबले 5 से 6 हजार रुपए का फायदा होगा।

यही नहीं कुछ के यहां तो प्रति एकड़ 20 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन हुआ है। इसके दाम भी 4 से 5 हजार रुपए प्रति क्विंटल आसानी से मिल रहे हैं, जबकि रसायनिक उर्वरकों पर आधारित गेहूं के दाम केवल 1735 रुपए प्रति क्विंटल हैं। इसी प्रकार प्राकृतिक खाद द्वारा उगाए गए आलू भी 40 से 50 रुपए प्रति किलोग्राम मिल रहा है, जबकि साधारण आलू 15 से 20 रुपए किलो मिल रहा है।

आचार्य देवव्रत व सुभाष पालेकर की प्रेरणा से हो रही खेती

महाराष्ट्र में जीरो बजट खेती के जनक सुभाष पालेकर से प्रेरणा लेकर लाखों किसानों ने प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल किया है। वहीं हरियाणा में हजारों किसानों ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत के आह्वान पर जीरो बजट खेती शुरू की है। हाल ही में रोहतक व जींद की जेल में आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक खाद के जरिए दर्जनों एकड़ में खेती की शुरूआत करवाई थी।

राज्यपाल द्वारा ही रोहतक के प्राचीन वैश्य गोशाला व भिवानी की पतराम गेट स्थित गोशाला में भी प्राकृतिक खाद का उत्पादन शुरू करवाया गया। इसके अलावा प्रदेश में एक दर्जन जगहों पर प्राकृतिक खाद तैयार किया जा रहा है। रोहतक स्थित एमडीयू में आने वाले दिनों में सैकंडों एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल कर सब्जियां व अनाज उगाने की योजना तैयार की गई है। ये सब्जियां व अनाज न केवल विश्वविद्यालय कैम्पस में रहने वाले स्टाफ को रियायती दरों में दी जाएंगी और प्रयोग यहां रहने वाले छात्र करेंगे।

भिवानी महापंचायत कर रही घनामृत खाद का उत्पादन

भिवानी महापंचायत की देखरेख में स्थानीय पतराम गेट स्थित गोशाला में अब तक 3 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक खाद यानी घनामृत मुफ्त वितरीत किया जा चुका है। महापंचायत के संरक्षक बृजलाल सर्राफ का कहना है कि जहर मुक्त व जीरो बजट खेती को बढ़ावा देने के लिए महापंचायत हर प्रकार के सहयोग के लिए तैयार है।

दो गुना तक फायदा

सामान्य गेहूं की खेती के लिए प्रति एकड़ कुल खर्च करीब 9850 रु. आता है। उत्पादन 20 क्विंटल होता है जिससे करीब 35000 रु. मिलते हैं और इस प्रकार एक किसान को प्रति एकड़ लगभग 25 हजार रु. की बचत होती है। वहीं एक एकड़ में प्राकृतिक रूप से देसी गेहूं के उत्पाद पर कुल खर्च करीब 9300 रु. आता है। एक एकड़ में उत्पादन 14 क्विंटल का होता है और लगभग मूल्य 4000 हजार रु. प्रति क्विंटल के हिसाब से कीमत 56000 रु. मिलती है। यानी लगभग 46 हजार रु. की बचत होती है।

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