पहली ही फसल में किसान ने खजूर की खेती से कमाए 4 लाख रु

इराक से शुरू हुई खजूर की खेती अब मिस्र, लीबिया, पाकिस्तान, यूएसए, सूडान,सऊदी अरब और भारत तक में होती है। भारत खूजर के सबसे बड़े इम्पोर्टर देशों में से भी एक है। खजूर का इस्तेमाल अचार, जूस, चीनी, स्टार्च, छुहारा और शराब बनाने में भी किया जाता है। इसकी हर एक चीज काम की है।

खजूर की गुठली से पोल्ट्री आहार तैयार किया जाता है। इसकी पत्तियों से टोकरियां, कागज, रस्सी और झाड़ू बनाई जाती है। कई बीमारियों में भी खजूर दवा की तरह काम करता है। इस तरह से खजूर की खेती करना भी काफी फायदे का सौदा है। इसकी कई तरह की किस्म होती हैं।

राजस्थान के बाड़मेर जिले के चाइटन तहसील के आलमसर गांव के किसान सादुलाराम सियोल ने पहले ही साल में खूजर की खेती कर साढ़े तीन लाख रुपए कमाए थे। आज हम बता रहे हैं आप कैसे खजूर की खेती कर लाखों रुपए कमा सकते हैं।

50 साल से भी ज्यादा होती है लाइफ

  • खजूर के पेड़ सालों तक लगे होते हैं, इनकी लाइफ 50 साल से भी ज्यादा होती है ऐसे में जरूरी है कि इनके बीच में प्रॉपर स्पेस रखा जाए।
  • इन पेड़ों की अच्छी ग्रोथ के लिए हर रो (पंक्ति) के बीच 8 मीटर तक का डिस्टेंस रखा जाता है।
  • प्रति हेक्टेयर इसके करीब 160 प्लांट लगाए जाते हैं।

जमीन को कैसे तैयार करें

  • जिस जमीन पर खेती करना है उसकी 2 से 3 बार जुताई जरूरी होती है। बाद में मिट्टी को एक लेवल में करना होता है।
  • इसके लिए खोदे गए गड्ढों को करीब 2 हफ्ते तक ओपन रखने की सलाह दी जाती है।
  • जुलाई से सितंबर का टाइम प्लांटिंग के लिए बेस्ट होता है।
  • यदि जमीन में इरिगेशन की फेसिलिटी है तो फार्मर खजूर के प्लांट के बीच वाली जगह में दूसरी फसलें भी लगा सकते हैं। जैसे काला चना, हरा चना, मसूर, पपीता या सब्जियां भी उगा सकते हैं।

कितना पानी देना जरूरी

  • पेड़ों को कितना पानी देना है यह एरिया की क्लाइमेट कंडीशन और मिट्टी की मॉइश्चर होल्ड करने की कैपेसिटी पर डिपेंड करता है।
  • पेड़ों में लगातार मॉइश्चर बने रहना चाहिए लेकिन पानी ठहरना नहीं चाहिए। बारिश के मौसम में अलग से पानी देने की कोई जरूरत नहीं होती।
  • भारी बारिश से पानी जम जाए तो उसका निकलना सही होता है, वरना यह प्लांट को डैमेज कर सकता है।
  • हर साल 5 से 6 बार सिंचाई पर्याप्त होती है। प्लांटिंग के तुरंत बाद फ्रिक्वेंट इरिगेशन की जरूरत होती है।

अच्छी क्वालिटी के लिए क्या करना जरूरी

  • अच्छी क्वालिटी के लिए ओर्गेनिक फर्टिलाइजर्स का यूज करना चाहिए। इससे खजूर की पैदावार भी बढ़ती है।
  • केमिकल फर्टिलाइजर N: P: K को 30:20:50 के रेशो में अप्लाई करना चाहिए। यह मार्च और अप्रैल के महीने में यूज करना चाहिए।
  • इंडिया में ‘N’ का रिकमंडेड डोज 1.40kg/ट्री है। एक एडल्ट ट्री को 600ग्राम ‘N’, 100 ग्राम ‘P’ और 75 ग्राम ‘K’ की जरूरत हर साल होती है।
  • खजूर में मादा पौधों के बीच में 10 फीसदी नर पौधे होने चाहिए।

अब होती है हार्वेस्टिंग

  • खजूर प्लांटिंग के 6 से 7 साल में हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हो जाते हैं। वैरायटी के हिसाब से खजूर अलग-अलग स्टेज में तोड़े जाते हैं। इसलिए हार्वेस्टिंग लोकल डिमांड पर भी डिपेंड करती है।
  • खजूर की पैदावार मिट्टी और क्लाइमेट पर डिपेंड करती है। 10 साल पुराना पेड़ हर साल 50 से 60 किलो खजूर देता है। साल दर साल इसकी खपत बढ़ती है। 15 साल तक एक पेड़ 80 किलो तक फल देता है।

विदर्भ के किसान की कहानी

68 साल के सवी थंगवाल विदर्भ के किसान हैं। जब खराब खेती से परेशान होकर विदर्भ के किसान आत्महत्या तक करने पर मजबूर हो गए थे तब थंगवाल ने एक अलग राह खोजी। उन्होंने ट्रेडीशनल खेती न करते हुए खजूर की खेती शुरू की। उन्होंने 2 एकड़ जमीन में खूजर के 130 प्लांट लगाए। एक प्लांट की कॉस्ट 6 हजार रुपए आई।

3 साल के बाद ही प्लांट में फ्रूट्स आना शुरू हो गए। चौथे साल 25 से 30 किलो खजूर प्रति पेड़ से प्राप्त होने लगे। खजूर बाजार में 300 रुपए किलो तक बिके। जिससे थंगवाल को बड़ा प्रॉफिट हुआ। अब उन्होंने 25 एकड़ जमीन में 300 प्लांट लगाए हैं। हर पेड़ से 100 किलो तक खजूर मिल रहा है। वे कहते हैं कि एक प्लांट को लगाने का खर्चा भी अब 3600 रुपए तक आ चुका है।

कितनी हुई इनकम

  • एक प्लांट की लागत 6 हजार रुपए।
  • इसी तरह 130 प्लांट की लागत 7 लाख 80 हजार रुपए।
  • एक प्लांट से 30 किलो खजूर एक सीजन में।
  • इसी तरह 130 प्लांट से 3900 किलो खजूर मिले।
  • एक किलो खजूर की कीमत 300 रुपए किलो।
  • इसी तरह 3900 किलो खजूर की कीमत 11 लाख 70 हजार रुपए।
  • इस तरह किसान को एक सीजन में ही 3 लाख 90 हजार रुपए का मुनाफा हुआ।
  • अगले सीजन से इसमें लागत की रकम भी नहीं जुड़ेगी और सौ प्रतिशत मुनाफा होगा।

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