ऐसे आप भी खुद त्यार करें कीटनाशक,दोगनी होगी पैदावार

किसान परंपरागत खेती कर मौसम की मार झेल घाटा सह रहे हैं, लेकिन जिले के कुछ किसान खेती में नए-नए प्रयोग कर अलग किस्म की खाद व कीटनाशक तैयार करने के साथ पैदावार तो बढ़ा ही रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों की मदद से खेती कर खूब मुनाफा भी कमा रहे हैं।

ये किसान खुद के बनाए कीटनाशक अौर खाद खेती में प्रयोग कर रहे हैं और कई प्रदेशों में इसकी सप्लाई भी कर रहे हैं। इनमें से कोई किसान बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़कर खेती कर रहा है तो कोई मजदूरी छोड़कर। यही नहीं, वे आस-पास के किसानों को उच्च तकनीक और सरकारी योजनाओं की मदद से खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं

पॉली हाउस या शेड नेट लगाने के लिए एक बार अधिक लागत लगती है, लेकिन बाद में किसान इससे काफी कमाई कर सकते हैं। छोटी जोत वाले किसान भी प्रशिक्षण लेकर परंपरागत खेती छोड़ आधुनिक तरीके से खेती शुरू करे तो आय काफी बढ़ सकती है।

गरीब किसान जो तकनीकी खेती में आने के लिए रुपए नहीं होने से डरते हैं, वे एमपीयूएटी या कृषि विभाग में जाकर सरकार के अनुदान के बारे में जानकारी ले सकते हैं।

कोई बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़ कृषि से कर रहा दोगुनी कमाई, कोई बेटे को एग्रीकल्चर में एमबीए करा तकनीकी खेती कर रहा 

3 कहानियां : जो न खुद खेती कर रहे हैं… नई तकनीक बताकर औरों को भी कर रहे प्रेरित

पिता तैयार करते हैं कीटनाशक, बेटा कृषि में एमबीए, अब करते हैं ऑनलाइन व्यापार

बुझड़ा गांव निवासी किसान वरदीचंद पटेल ने कुछ साल पहले एमपीयूएटी में प्रशिक्षण लेकर वर्मीकंपोस्ट खाद बनाना शुरू किया। खुद की खेती में प्रयोग किया व आसपास भी सप्लाई किया।

फिर एग्रीकल्चर में एमबीए बेटा भी इस व्यापार से जुड़ा और ऑनलाइन ऑर्डर लेना शुरू किया। आज एमपी, हिमाचल प्रदेश तक खाद सप्लाई करते हैं। दोनों अन्य किसानों को प्रशिक्षण भी देते हैं। दोनों की सालभर की कमाई 12 लाख से अधिक है।

वर्मीकंपोस्ट खाद

बैंक की नौकरी छोड़ शुरू की खास मिर्च की खेती, नौकरी से दोगुनी कमाई कर रहे

फतहनगर के नारायण सिंह उर्फ राजू पहले बैंक मैनेजर थे। नौकरी के दौरान भीलवाड़ा में एक किसान का मिर्च फार्म देखा। उस किसान ने सालभर में मिर्च बेचकर 13 लाख से अधिक कमाए थे।

इसके बाद राजू ने नौकरी छोड़कर किसान से प्रशिक्षण लिया। फिर गोपालसागर में 85 हजार प्रतिवर्ष किराए पर चार बीघा जमीन ली और मिर्च की खेती शुरू की। पिछले साल डेढ़ लाख लगाकर इजराइली पैटर्न पर मलचिंग स्टाइल में मिर्च लगाई। चार माह में ही साढ़े तीन लाख कमाए।

मजदूरी छोड़ शुरू की खीरे की खेती, पहली फसल में 6-7 लाख का मुनाफा

सलूंबर जैताणा के कांतीलाल मेहता व सराड़ा चावंड के शिवराम जोशी महाराष्ट्र में मजदूरी करते थे। वहीं हाइटेक खेती का प्रशिक्षण लिया और यहां खेती में संभावनाएं तलाशी। फिर मजदूरी छोड़ वापस उदयपुर आए और पॉली हाउस में खेती करने का प्रशिक्षण लिया।

पिछले साल दोनों ने अलग-अलग अनुदान प्राप्त कर 4 हजार वर्ग मीटर का पॉली हाउस लगाया व खीरा-ककड़ी की खेती शुरू की। पहली फसल में ही कांतीलाल को 6 लाख व शिवराम को 7 लाख का मुनाफा हुआ।

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