किसानो ने RTI तहत मांगी थी ये जानकारी , विभाग ने 150 किलो कागज पर लिख भेजा जवाब

गेहूं और सरसों की खरीद से जुड़ी जानकारियां एवं किसानों को किए गए भुगतान के संबंध में मांगी गई आरटीआइ के बदले सिरसा के हैफेड विभाग ने 68,834 रुपये सूचना के बदले वसूल किए हैं। सूचना के 32017 पेज बनाए गए है। 32017 पेजों की सूचना के लिए एक ¨क्वटल साठ किलो कागज डाक विभाग के पास भेजा गया है।

दड़बा निवासी अनिल कस्वां ने सूचना उपायुक्त कार्यालय से मांगी कि सरसों व गेंहू की कितनी कितनी खरीद हुई। कितने किसानों ने फसल बेची और विभाग के पास किसानों को देने के लिए कब बजट पहुंचा। बैंक में किस खाते में कितने दिनों तक राशि रखी गई या अन्य खातों में रखी गई, उनकी जानकारी मांगी गई थी।

साथ ही उन किसानों की जानकारी भी मांगी गई, जिनके खातों में अभी तक राशि नही गई। उपायुक्त कार्यालय ने 25 जून 2018 को इस सूचना को हैफेड और फूड सप्लाई विभाग को भेज दिया और जानकारी उपलब्ध करवाने को कहा।

हैफेड ने 16 जुलाई को आवेदक को पत्र भेज कर 68,834 रुपये जमा करवाने को कहा, जिसमें 32017 पेजों की सूचना तैयार किए जाने व 800 रुपये पोस्टल खर्च के बताए गए। प्रति पेज दो रुपये की दर से बताते हुए 19 जुलाई को डाक से सूचना भेजी गई, जिसके बाद शिकायतकर्ता की ओर से 30 जुलाई को बैंक के माध्यम से मांगी गई राशि जमा करवा दी गई।

विभागीय अधिकारियों ने सूचना भेज देने की जानकारी दे रहे हैं और एक् ¨क्वटल साठ किलो वजन की सूचना भेजी गई है। उधर डाक विभाग को इतनी अधिक मात्रा में डाक भेजने के लिए सिरसा से दड़बा के लिए गाड़ी भेजनी होगी। डाक विभाग के कर्मचारी ने बताया कि हैफेड की डाक दड़बा कलां के लिए आई है। स्पेशल गाड़ी भेजनी पड़ रही है। कर्मचारियों के अनुसार आरटीआइ में इतना अधिक वजनी सूचना भेजने का सिरसा का यह पहला मामला है।

मुझे तो अभी तक नहीं मिली डाक

आरटीआइ लगाने वाले अनिल कुमार ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से हैफेड के अधिकारी सूचना उपलब्ध करवाने की बात कह रहे है परंतु उसे अभी तक सूचना नहीं मिली है। हालांकि यह जरूर बताया जा रहा है कि डाक से सूचना भेज रहे हैं। उसने यह भी बताया कि अभी भी किसानों को फसल बेचने का भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है और वे इसकी सूची भी दे सकते हैं। सूचना नहीं सैकड़ों पेड़ काट दिए, चुप नहीं बैठूंगा

आरटीआइ कार्यकर्ता करतार ¨सह ने कहा कि बड़ी ही हैरानी वाली बात है कि जो जानकारी साफ्ट कॉपी में दी जा सकती थी, उसके लिए 96000 से अधिक पेज नष्ट कर दिया गया। जिसका मतलब है असंख्य पेड़ कट गए। क्योंकि सूचना देने से पूर्व एक कॉपी विभाग के पास रही होगी, एक आरटीआइ कार्यकर्ता को गई और एक उपायुक्त कार्यालय को भी गई होगी, क्योंकि आरटीआइ वहीं से आई थी।

अगर उपायुक्त कार्यालय को भी छोड़ दें तो भी 64000 पेज तो तैयार हुए हैं। इससे मंशा है कि अधिकारी किसी गलत नीयत को छिपाने के लिए असंख्य कागजात की राशि तैयार कर आवेदक को परेशान करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव को पत्र लिख दिया है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भी जानकारी दी गई है और उन्होंने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश को भी पत्र भेजकर कहा है कि आरटीआइ से आभास हो रहा है कि जो सूचना 50 से 100 पेज में तैयार की जा सकती थी उसके लिए 32000 पेज की सूचना गलत मंशा से तैयार की गई। सिरसा हैफेड का कैग से स्पेशल ऑडिट करवाया जाना चाहिए।

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