किसान द्वारा सलेक्शन विधि से तैयार की 3 फीट लंबी काले रंग की देशी गाजर

झीगरबड़ी के प्रगतिशील किसान झाबर मल पचार द्वारा सलेक्शन विधि से तैयार की गई तीन फीट लंबी काले रंग की देशी गाजर की तर्ज पर देशभर में बुआई होगी। किसान द्वारा तैयार किया गया देशी गाजर का बीज राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान अहमदाबाद की टीम ने कारगर माना है।

इस विधि की संस्थान द्वारा देशभर के किसानों के उपयोग के लिए सिफारिश की जाएगी। पचार ने प्रयोग सफल होने के बाद इस साल 200 किलो देशी गाजर का बीज तैयार किया। यह बीज शेखावाटी सहित देश के कई हिस्सों के किसानों को बुआई के लिए सप्लाई किया गया।

पचार ने बताया कि काली देशी गाजर की खासियत है कि किसान को सामान्य फसलों से पांच गुना ज्यादा पैदावार मिल रही है। एक कंद 400 से 500 ग्राम वजन तक है। कंद की मोटाई भी सामान्य है। नवप्रवर्तन संस्थान अहमदाबाद की टीम ने किसान के खेत से फसल का जायजा लिया है।

वहीं संस्थान द्वारा अपने स्तर पर पचार द्वारा तैयार गाजर को पूसा प्रदर्शनी में भी प्रदर्शित किया जा चुका है। उद्यान विभाग के क्षेत्रीय उपनिदेशक हरलाल सिंह बिजारणियां का कहना है कि झीगर के किसान झाबर मल पचार द्वारा तैयार किया गया देशी गाजर का बीज एक अनूठा प्रयोग है। यह किस्म देशी गाजर उत्पादन में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

मिठास शक्कर जैसी आती है |बीज की गुणवत्ता मिठास बढ़ाने के लिए किसान ने घी शहद से बीजोपचार किया है। उद्यान विभाग के अनुसार बीजोपचार के बाद खेत में तैयार गाजर के कंद में शक्कर जैसी मिठास रही है। बीज को किसान ने एक किलो बीज को पांच ग्राम घी पांच ग्राम शहद में मिलाकर उपचारित किया। इस विधि से बीज का अंकुरण भी जल्दी होता है।

यूं तैयार किया देशी गाजर का बीज

तीनसाल पहले काली गाजर के ज्यादा लंबाई वाले कंद की छंटनी शुरू कर दी। तीन साल बाद अक्टूबर में किसान ने लंबे बीज वाले कंद से 300 वर्ग फीट क्षेत्र में प्रायोगिक तौर पर गाजर की बुआई की। चार माह में किसान के खेत में तीन फीट लंबी काले रंग की देशी गाजर का कंद तैयार हो गया है।

1 बीघा बीज की खेती से 18 लाख की आय

झाबरमल पचार का कहना है वह देशी गाजर की खेती से सालाना 8 से 10 लाख रुपए कमा रहा है। इस बार उन्होंने एक बीघा में गाजर के बीज की खेती की है। करीब डेढ़ क्विंटल बीज उत्पादन की उम्मीद है। मार्केट भाव 1200 रुपए प्रतिकिलो तय किया है। इससे सीजन में 18 लाख की आमदनी की उम्मीद है।

एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी एवं बीज एजेंसियों की प्रदर्शनियों में काबिलियत जानने के बाद बुआई सीजन शुरू होने से पहले ही दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, कोलकाता सहित राजस्थान के कई जिलों से 3 हजार से ज्यादा किसानों ने बीज की एडवांस बुकिंग करा दी है। हालांकि अभी तक बीज सरकारी एजेंसी से प्रमाणित नहीं हुआ है। यह मांग कंद की गुणवत्ता और मिठास को देखते हुए बढ़ी है।

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