ऐसे करें नीम का खेती में इस्तेमाल ,महंगे कीटनाशक से मिल जायगा छुटकारा

नीम का वृक्ष प्रकृति का अनुपम उपहार हैं। नीम से तैयार किये गए उत्पादों का कीट नियंत्रण अनोखा हैं, इस कारण नीम से बनाई गई दवा विश्व में सबसे अच्छी कीट नियंत्रण दवा मानी जाती हैं। लेकिन इसके उपयोग को लोग अब भूल रहे हैं। इसका फायदा अब बड़ी-बड़ी कम्पनिया उठा रही हैं ये कम्पनिया इसकी निम्बोलियों व पत्तियों से बनाई गई कीटनाशक दवाये महंगे दामों पर बेचती हैं।

इसकी कड़वी गन्ध से सभी जिव दूर भागते हैं। वे कीट जिनकी सुगंध क्षमता बहुत विकसित हो गयी हैं, वे इसको छोड़कर दूर चले जाते हैं जिन पर नीम के रसायन छिड़के गए हों।

इसके संपर्क में मुलायम त्वचा वाले कीट जैसे चेंपा, तैला, थ्रिप्स, सफेद मक्खी आदि आने पर मर जाते हैं। नीम का मनुष्य जीवन पर जहरीला प्रभाव नहीं पड़ना ही इसको दवाओं के रूप में उच्च स्थान दिलाता हैं। नीम की निम्बोलिया जून से अगस्त तक पक कर गिरती हैं निम्बोली का स्वाद हल्का मीठा होता हैं।

इसकी निम्बोली गिरने पर सड़कर समाप्त हो जाती हैं परन्तु गिरी सफेद गुठली से ढकी होने के कारण लम्बे समय तक सुरक्षित रहती हैं। निम्बोली को तोड़ने पर 55% भाग गुठली के रूप में अलग हो जाता हैं। तथा 45% गिरी के रूप में प्राप्त होता हैं। अच्छे ढंग से संग्रहित की गई गिरी हरे भूरे रंग की होती हैं।

नीम से तैयार दवाइयों के अनेक गुण

  •  रासायनिक दवाइयों की स्प्रे नीम में मिलाकर करें। इस तरह करने से रासायनिक दवाइयों के प्रयोग में 25-30 प्रतिशत तक कमी आती है।
  • नीम की स्प्रे सुबह या शाम के समय करनी चाहिए।
  • नीम केक पाउडर डालने से खेत में बहुत तरह के प्रभाव देखे जा सकते हैं जैसे कि इससे पौधे निमाटोड और फंगस से बचे रहते हैं। इस विधि से ज़मीन के तत्व आसानी से पौधे में मिल जाते हैं।
  •  नीम हानिकारक कीटों के जीवन चक्र को भी प्रभावित करती है, जैसे कि अंडे, लार्वा आदि। इसके अलावा भुंडियों, सुंडियों और टिड्डों आदि पर भी प्रभाव पड़ता है। यह रस चूसने वाले कीटों की ज्यादा रोधक नहीं है।
  • यदि नीम का गुद्दा यूरिया के साथ प्रयोग किया जाये, तो खाद का प्रभाव बढ़ जाता है और ज़मीन के अंदरूनी हानिकारक बीमारियों और कीटों से बचाव होता है।
  • दीमक से बचाव के लिए 3-5 किलो नीम पाउडर को बिजाई से पहले एक एकड़ मिट्टी में मिलायें।
  • मूंगफली में पत्ते के सुरंगी कीट के लिए 1.0 प्रतिशत नीम के बीजों का रस या 2 प्रतिशत नीम के तेल की स्प्रे बिजाई के 35-40 दिनों के बाद करें।
  • जड़ों में गांठे बनने की बीमारी की रोकथाम के लिए 50 ग्राम नीम पाउडर को 50 लीटर पानी में पूरी रात डुबोयें और फिर स्प्रे करें

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