सिंगापुर से लौटकर शुरू किया बिजनेस, नए आइडिया से हो रही करोड़ों की कमाई

अखबार में एक खबर पढ़कर क्या कोई अपना 30 साल का सुनहरा कैरियर छोड़ सकता है। हां एक इंडियन ने ऐसा ही किया। इस शख्स ने सिंगापुर से भारत के सफर के दौरान एक खबर पढ़ने के बाद सिंगापुर के एक शख्स ने अपना 30 साल का सुनहरा करियर छोड़ दिया और भारत आकर 20 एकड़ के फार्म में डेयरी चलाने लगा।

इस शख्स का नाम है दीपक गुप्ता, जो पंजाब के नाभा में सफलता से हिमालय क्रीमी नाम से डेयरी फार्म चला रहे हैं, जो सालाना करोड़ों रुपए की कमाई कर रही है। इस डेयरी में कई खासियतें भी हैं।

चंडीगढ़ से की थी पढ़ाई

दीपक गुप्ता फिलहाल अपने इस नए कैरियर से काफी खुश हैं। दीपक ने 30 साल सिंगापुर में मल्‍टीनेशनल कंपनी में बिताए, लेकिन देश से जुड़ने की इच्‍छा हरदम बनी रही। उन्‍होंने अपनी पढ़ाई चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से पूरी की थी और फिर कैरियर बनाने के लिए सिंगापुर चले गए। हालांकि उनके मन में हरदम से था कि एक हाईटेक डेयरी खोली जाए।

सिंगापुर से आते जाते मिला आइडिया

उन्‍होंने बताया कि बिना हाथ लगाए दूध की पैकिंग का आइडिया उन्‍हें सिंगापुर से भारत के सफर के दौरान मिला था। उन्‍होंने बताया कि वह अक्‍सर भारत में अखबारों में मिलावटी दूध के बारे में पढ़ते थे, तभी उनके मन में कुछ नया करने की बात आई।

नौकरी छोड़कर पूरा किया सपना

दीपक दो साल पहले सिंगापुर से लौटे और अपने सपने का पूरा करने में जुट गए। इन दो साल में उन्‍होंने मेहनत की और अब सपना पूरा हो गया है। उन्‍होंने पंजाब में नाभा में हिमालया क्रीमी के नाम से डेयरी की स्थापना की है। नाभा चंडीगढ़ से दो घंटे की ड्राइव पर है। उनके अनुसार उनका सपना भारत में ऐसी डेयरी स्‍थापित करना था, जो बिना हाथ लगाए दूध को पैक करे, जिससे उसकी शुद्धता बनी रहे।

विदेश का करियर छोड़ने का पछतावा नहीं

54 साल के दीपक को कहना है कि उनको अपने विदेश के शानदार कैरियर को छोड़ने का बिल्‍कुल भी पछतावा नहीं है। उन्‍होंने अपनी 20 एकड़ जमीन पर डेयरी तैयार की और जर्सी सहित अच्‍छी नस्‍ल की गायों को यहां पर पाला।

इस वक्‍त इनकी डेयरी में करीब 200 गाय हैं,‍ जिनका दूध मशीनों से निकाला जाता है। उनके अनुसार इस डेयरी में दूध को बिना हाथ लगाए पैक किया जाता है। इससे दूध की शुद्धता बनी रहती है।

प्‍योर दूध उपलब्‍ध कराना ध्‍येय

उनके अनुसार उनका सपना लोगों को प्‍योर दूध उपलब्‍ध कराना था। उनके अनुसार विदेश में बिना हाथ लगाए सामान को डेयरी पर पैक करने का सिस्‍टम आम है, लेकिन भारत में ऐसा नहीं होता है। उन्‍होंने ही यहां इसकी शुरुआत की।

विदेश का अनुभव काम आया

उन्‍होंने बताया कि विदेश में वह ऐसी मल्‍टीनेशनल कंपनी में काम करते थे जो एग्रीकल्‍चर के कारोबार से जुड़ी हुई थी। उनका इस कंपनी में काम करने का अनुभव काम आया। इसके बाद उन्‍होंने सीधे फार्म से पैक दूध लोगों को उपलब्‍ध कराने की योजना पर काम किया और सफलता पाई।

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