सोर ऊर्जा से इस किसान ने कीटों को भगाने के लिए खोजा अनोखा तरीका

पिछले कुछ सालों में कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल से पर्यावरण के लिए कई तरह के खतरे पैदा हो रहे हैं। इससे न सिर्फ अनाज ज़हरीला हो जाता है बल्कि इससे ग्राउंड वॉटर टेबल भी बिगड़ रही है।

आजकल देशभर के हज़ारों किसान इस बात को समझ चुके हैं कि रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों के इस्तेमाल से पर्यावरण को कितना नुकसान हो रहा है और हमारी सेहत को भी खतरा है। इसी को देखते हुए वे अब इसके लिए नए और सुरक्षित तरीके खोज रहे हैं।

केरल के पलक्कड़ ज़िले के चित्तूर ब्लॉक में इलापुल्ली गांव के एक किसान ने अपने खेत से कीटों को भगाने का एक अनोखा तरीका खोजा है। चंद्रन नाम के इस किसान ने कीटों से छुटकारा पाने के लिए एक सस्ता और इको फ्रेंडली उपाय खोजा है जो सूर्य की रोशनी से काम करता है।

केरल के एक लोकल न्यूज़ पोर्टल मातृभूमि में छपी ख़बर के मुताबिक, चंद्रन अपने 6 एकड़ के खेत में धान की खेती करते हैं। वह यहां के कृषि विभाग द्वारा बताई जाने वाली तकनीकों के साथ अक्सर नए एक्सपेरिमेंट करते रहते हैं।

उन्होंने एक ऐसा सोलर लाइट ट्रैप बनाया है जो कीटों को मार देता है और किसी रासायनिक कीटनाशकी की ज़रूरत भी नहीं पड़ती। इस उपकरण को बनाने के लिए एक ट्राइपॉड के ऊपर एक कटोरी रखी और उसमें एक एलईडी बल्ब और सोलर पैनल लगाया गया।

इस उपकरण को चलाना बहुत ही आसान है। बल्ब से शाम को 6.30 से 9.30 बजे के बीच नीली रोशनी निकलती है जो कीटों को अपनी ओर आकर्षित करती है। बल्ब के ठीक नीचे एक ज़हर का ट्रैप है जो न सिर्फ इन कीटों को पकड़ लेता है बल्कि वे तुरंत मर भी जाते हैं।

ये मशीन सिर्फ उसी समय काम करती है जब कीटों का हमला खेत में सबसे ज्यादा होता है। 10 बजे के बाद ये मशीन काम नहीं करती ताकि खेत को फायदा पहुंचाने वाले कीटों को नुकसान न पहुंचे।ये मीशन सोलर एनर्जी की मदद से अपने आप काम करती है।

चंद्रन की बनाई इस मशीन से फसल की कीटों से रक्षा भी हो जाती है और वह रासायनिक कीटनाशकों से सुरक्षित भी रहती है। उनकी इस मशीन के फायदों को देखते हुए एलाप्पुल्ली के कई किसानों ने अपने खेतों में ये उपकरण लगाया है।

ये उपकरण पूरी तरह से ऑटोमैटिक है बस कटोरी में रखे पॉइज़न ट्रैप को दो दिनों में बदलने की ज़रूरत होती है। किसान एक खेत में एक से ज्यादा उपकरण लगा सकते हैं और इसकी जगह में भी बदलाव कर सकते हैं। एलाप्पुल्ली के कृषि भवन में फील्ड असिस्टेंट रजिता कहती हैं कि ये ट्रैप इको फ्रेंडली है और रासायनिक कीटनाशकों से अपनी फसल को बचाने का अच्छा उपाय भी।

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