71 साल के किसान का कमल ,इस नई तकनीक से ऊगा दी सूखे में धान की फसल

छतीसगढ़: ग्राम रेड़ा के 71 वर्षीय ननकी दाऊ साहू द्वारा कृषि में कुछ नया करने की जुनून देखते ही बनता है। इनकी खेती के प्रति वैज्ञानिक सोच और एसआरआई पद्घति से धान की खेती कर रहें हैं। इस पद्घति से की जा रही खेती से सूखा के बाद भी हरियाली नजर आ रही है।

सारंगढ़ एवं बरमकेला अंचल के किसान धान की खेती में सूखे की मार झेल रहे हैं। इन ब्लाकों के तो कई-कई गांव में धान की फसल पुरी तरह से समाप्त हो चुकी है। लेकिन ननकी की धान की फसल लहलहा रही है। जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल ननकी दाऊ एसआरआई पद्घति से धान की खेती कर रहें हैं। इस पद्घति से की जा रही खेती से इनकी खेतों में एक अजीब सी हरियाली नजर आ रही हैं।

वहीं इनके एक खेत में लगे मकरंद धान की फसल के खेत के पास से गुजरने में एक भिनी भिनी खुशबू आती है। जिसे देखने के लिए आसपास गंाव के किसान ही नहीं दूर दराज के किसान भी देखने आ रहें हैं। कृषक ननकी दाऊ बताते है कि इस वर्ष जब पुरे देश में कमजोर मानसून होने की आशंका की खबर सुनने के बाद वह अपनी खेतों में एसआरआई पद्घति से धान की फसल लेने का निर्णय लिया।

इस विधि से धान की खेती में कई फायदे हैं। पारंपरिक खेती इसकी खेती बहुत अच्छी है। बीज दर में भी बहुत फर्क है। पारंपरिक खेती में प्रति एकड़ 30 किलो धान बीज लगता है। जबकि इसकी खेती में प्रति एकड़ 2.5 से 3 किलो धान बीज लग रहा है। पारंपरिक खेती में प्रति एकड़ 20 से 21 हजार खर्च आता है।

वर्तमान में इस खेती में अभी तक प्रति एकड़ की खेती में 5 हजार 800 रुपए खर्च आया है। 4 से 5 हजार कटाई के दौरान खर्च आएगा। वहीं रसायनिक खाद के स्थान पर वह केंचुआ डाल रहा है। इससे धान में होने वाले बीमारी एवं कीड़े नहीं हो रहे हैं। जिस कारण कीटनाशक एवं फफूंद नाशक दवाई का उपयोग नहीं हो रहा है। केंचुआ खाद से धान के लिए सभी पोषण तत्व होने से रसायनिक खाद डालने की आवश्यकता नहीं हो रही है।

एसआरआई विधि में कम पानी में अच्छी धान की फसल 

एसआरआई विधि में लगातार खेत में पानी नहीं रखा जाता है जड़ों को आर्द्र रखने लायक पानी दिया जाता है। आमतौर पर पारंपरिक धान की खेती में एक किलो के धान के उत्पादन में करीब 3 हजार 5 सौ लीटर की आवश्यकता होती है। कृषि अधिकारियों द्वारा इस पद्घति में खेती करने से करीब 1 हजार लीटर पानी में ही एक किलो धान उत्पादन बताया जा रहा है।

ननकी को मिल चुके हैं कई सम्मान 

नककी दाऊ को खेती करने का अजीब सा जिद व जुनून सवार रहता है। 71 वर्ष के उम्र में भी रोजाना खेतों में 8 घंटा तक का समय देता है। यही कारण है कि इनकी खेती की चर्चा होनी लगी है। 10 नवम्बर 2014 को भारतीय किसान संघ अधिवेशन नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री व वर्तमान के उपराष्ट्रपति वैंकैया नायडू ने कृषि क्षेत्र में अच्छे कार्य को लेकर सम्मानित हुए। वही जयपुर में 20 फरवरी 2016 आयोजित भारतीय किसान संघ अधिवेशन में भी सम्मान किया गया। सारंगढ़ ब्लाक के ग्राम रेड़ा के कृषक ननकी दाऊ की लहलहा रही है जबकि सारंगढ़ अंचल सूखे के चपेट से जूझ रहा है।

एसआरआई विधि से की गई धान की खेती से बीज दर न्यूनतम मात्रा में आता है। वही कम पानी व कम लागत से अच्छी पैदावार किसान पा सकते है। इस विधि में किस्सों की संख्या 45 से 50 तक जाती है। इससे उत्पादन में फर्क आता है। वहीं इस खेती में देशी खादों का उपयोग होता है। ” जीपी गोस्वामी, वरिष्ठ कृषि अधिकारी, सारंगढ़

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *