राउंडअप का उपयोग करने वाले किसान को इस कारण मिलेगा 1,900 करोड़ रुपये का मुआवजा

अमरीका के सैन फ्रांसिस्को में एक माली ने एक बड़ी कंपनी के ख़िलाफ लगभग (1900 करोड़) 29 करोड़ डॉलर का मुकदमा जीत लिया है.डिवेन जॉनसन की ज़िंदगी में जीत की इस खुशी से पहले कैंसर आया जो उन्हें माली की नौकरी के दौरान हुआ.

कैंसर का पहला लक्षण दिखा लाल चकते के रूप में जो उनके लगभग 80 फ़ीसद शरीर में फैल गए थे. जॉनसन तब 42 साल के थे. साल 2012 में बेनिसिया के स्कूलों में माली का काम करने के दौरान उन्होंने पौधों में साल भर खरपतवार नाशक दवा लगाई. ये दवा थी- राउंडअप एंड रेंजर प्रो हर्बिसाइड जिसे मोन्सेंटो कंपनी बनाती है.

साल 2014 में पता चला कि उन्हें हॉजकिन लिम्फ़ोमा कैंसर है. कंपनी मोन्सेंटो के ख़िलाफ़ मुक़दमे के लिए उन्होंने साल 2015 में तैयारी शुरू की. जॉनसन का दावा इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के शोध पर आधारित था

जिसमें राउंडअप हर्बिसाइड को कैंसर का कारण बताया गया है. इस हर्बिसाइड में ग्लाइफोसेट होता है जो कैंसर पैदा कर सकता है. ये एजेंसी विश्व स्वास्थ्य संगठन से संबद्ध है.

खुशखबरी ! दुनिया के बाजार में अब कहीं भी फसल बेच सकेंगे भारत के किसान

भारत के किसानों की अब दुनिया के बाजार में सीधी पहुंच होगी। सरकार ने कृषि उत्पाद के निर्यात के लिए देश के 50 जिलों की पहचान की है। इन जिलों में 20 कृषि आइटम के क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। क्लस्टर में खेती के साथ उत्पादित वस्तुओं को निर्यात के लायक बनाने की सारी सुविधाएं होंगी। मतलब, क्लस्टर के निकलने के बाद ये कृषि उत्पाद सीधे निर्यात के लिए पोर्ट पर जाएंगे।

2020 तक कृषि निर्यात को 60 अरब डॉलर करने का लक्ष्य

वाणिज्य मंत्रालय ने कृषि निर्यात को 2020 तक 60 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। अभी कृषि निर्यात 31 अरब डालर का है। विश्व भर में होने वाले कृषि निर्यात कारोबार में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2.2 फीसदी है।

20 कृषि उत्पादों पर होगा फोकस

वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक क्लस्टरों में 20 कृषि उत्पादों की खेती की जाएगी। खेती निर्यात बाजार को ध्यान में रखकर की जाएगी। चिन्हित उत्पादों में

अंगूर, अनानास, केला, सेब, लीची, संतरा, गुलाबी प्याज, प्याज, आलू, टमाटर, चाय, कॉफी, मिर्च, अदरक, पुदीना, हल्दी, जीरा,मेथी, रबर व समुद्री उत्पाद शामिल हैं। क्लस्टर विकसित करने के लिए राज्य सरकार की भी मदद ली जाएगी। क्लस्टर में शामिल किसानों को सरकार की तरफ से इंसेंटिव भी दिए जाएंगे। हालांकि इंसेंटिव का मैकेनिज्म राज्य सरकार से परामर्श के बाद तैयार किया जाएगा।

सभी इलाके में होंगे कृषि निर्यात क्लस्टर

वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक क्लस्टर देश के सभी इलाके नार्थ, वेस्ट, ईस्ट, वेस्ट व सेंट्रल में स्थित होंगे। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक प्याज के लिए मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र में क्लस्टर विकसित किए जाएंगे।

मध्य प्रदेश के इंदौर, सागर व दामोह तो महाराष्ट्र के नासिक में प्याज के लिए क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। आलू के निर्यात के लिए उत्तर प्रदेश के आगरा, फर्रुखाबाद, पंजाब के जालंधर, कपूरथला,होशियारपुर, नवांशहर, गुजरात के बनस्कंथा, सबरकंथा तो मध्य प्रदेश के इंदौर व ग्वालियर में कल्स्टर तैयार होंगे।

टमाटर के निर्यात के लिए मध्य प्रदेश के शहडोल, कर्नाटक के कोलार, आंध्र प्रदेश में करनूल तो उत्तरांचल में रूद्रपुर में क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। मेथी के निर्यात के लिए राजस्थान के सीकर व बीकानेर को चिन्हित किया गया है। लीची के निर्यात के लिए बिहार के मुजफ्फरपुर तो जीरा निर्यात के लिए गुजरात के मेहसाना व बनसकंथा चिन्हित किए गए हैं।

निजी कंपनियां भी होंगी सहभागी

मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि कृषि निर्यात क्लस्टर विकसित करने में निजी कंपनियों को भी सहभागी बनाया जा सकता है। क्लस्टर में निर्यात सुविधा स्थापित करने में निजी कंपनियां अपना योगदान दे सकती है।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक कृषि निर्यात में 52 फीसदी योगदान मांस, चावल व समुद्री उत्पाद का है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2013 में भारत का कृषि निर्यात 36 अरब डॉलर का था जबकि वर्ष 2017 में कृषि निर्यात घटकर 31 अरब डॉलर का रह गया।

दुनिया की सबसे ताकतवर सब्जी है ये, खाएंगे तो शरीर बन जाएगा फौलादी

आजकल के दौर में जंक फूड का इतना क्रेज बढ़ चुका है कि लोग अपने शरीर को जरूरी ताकत देनी वाली सब्जी, दाल का सेवन कम ही करते हैं. लेकिन, बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ सबज्यिां ऐसी होती हैं, जिन्हें कुछ दिन खाने पर ही इसका फायदा मिल जाता है.

ऐसी ही एक सब्जी है कंटोला. यह दुनिया की सबसे ताकतवर सब्जी है. इसे औषधि के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. इस सब्जी में इतनी ताकत होती है कि महज कुछ दिन के सेवन से ही आपका शरीर तंदुरुस्त बन जाता है या यूं कहें कि फौलादी बन जाता है. कंटोला को ककोड़े और मीठा करेला नाम से भी जाना जाता है.

कंटोला आमतौर पर मॉनसून के मौसम में भारतीय बाजारों में देखा जाता है. इसमें कई स्वास्थ्य लाभ है जिसकी वजह से इसकी खेती दुनियाभर में शुरू हो गई है. इसकी मुख्य रूप से भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में खेती की जाती है.

यह सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ प्रोटीन से भरपूर होती है. इसे रोज खाने से आपका शरीर ताकतवर बनता है. इसके लिए कहा जाता है कि इसमें मीट से 50 गुना ज्यादा ताकत और प्रोटीन होता है. कंटोल में मौजूद फाइटोकेमिकल्स स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में काफी मदद करता है. यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर सब्जी है. यह शरीर को साफ रखने में भी काफी सहायक है.

अगर आप भी अपनी रोजाना डाइट में इसे शामिल करते हैं तो दूसरे तत्वों और फाइबर की कमी को भी यह पूरी करती है. ककोड़े यानी मीठा करेला को सेहतमंद माना जाता है. आयुर्वेद में भी इसे सबसे ताकतवर सब्जी के रूप में माना गया है.

एंटी एलर्जिक : कंटोल में एंटी-एलर्जन और एनाल्जेसिक सर्दी खांसी से राहत प्रदान करने और इस रोकन में काफी सहायक है.

हाई ब्लड प्रेशर होगा दूर : कंटोला में मौजूद मोमोरडीसिन तत्व और फाइबर की अधिक मात्रा शरीर के लिए रामबाण हैं. मोमोरेडीसिन तत्व एंटीऑक्सीडेंट, एंटीडायबिटीज और एंटीस्टे्रस की तरह काम करता है और वजन और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है.

पाचन क्रिया होगी दुरुस्त : अगर आप इसकी सब्जी नहीं खाना चाहते तो अचार बनाकर भी सेवन कर सकते हैं. आयुर्वेद में कई रोगों के इलाज के लिए इसे औषधि के रूप में प्रयोग करते हैं. यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

कैंसर से बचाए : कंटोला में में मौजूद ल्युटेन जैसे केरोटोनोइडस विभिन्न नेत्र रोग, हृदय रोग और यहां तक कि कैंसर की रोकथाम में सहायक है.

वजन घटाने में सक्षम: कंटोला में प्रोटीन और आयरन भरपूर होता है जबकि कैलोरी कम मात्रा में होती है. यदि 100 ग्राम कंटोला की सब्जी का सेवन करते हैं तो 17 कैलोरी प्राप्त होती है. जिससे वजन घटाने वाले लोगों के लिए यह बेहतर विकल्प है.

छत पर ऐसे उगाएं बिना मिट्टी से सब्‍जी,1 लाख के निवेश पर होगी 2 लाख तक कमाई

खेतों के घटते आकार और ऑर्गेनिक फूड प्रोडक्ट की बढ़त मांग के चलते अर्बन फार्मिंग में नई और कारगर तकनीकों का चलन बढ़ता जा रहा है। मांग पूरी करने के लिए कारोबारी और शहरी किसान छतों पर, पार्किंग में या फिर कहीं भी उपलब्ध सीमित जगह का इस्तेमाल पैदावार के लिए कर रहे हैं।

इन तकनीकों में फिलहाल जो तकनीक सबसे ज्यादा सफल है उसमें मिट्टी का इस्तेमाल ही नहीं होता। मिट्टी न होने से इसे छतों पर छोटी जगह में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। ये तकनीक इतनी सफल है कि सही जानकारी, सही सलाह से लगभग 1 लाख रुपए के खर्च से से आप घर बैठे सालाना 2 लाख रुपए तक की सब्जियां उगा सकते हैं।

मिट्टी के बिना अब छतों पर फार्मिंग

इस तकनीक को हाइड्रोपानिक्स कहा जाता है। इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें मिट्टी का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं होता है। इससे पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों को पानी के सहारे सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है।

क्या है हाइड्रपानिक्स तकनीक

हाइड्रपॉनिक्स तकनीक में सब्जियां बिना मिट्टी की मदद से उगाई जातीं हैं। इससे पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों को पानी के सहारे सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है।

पौधे एक मल्टी लेयर फ्रेम के सहारे टिके पाइप में उगते हैं और इनकी जड़े पाइप के अंदर पोषक तत्वों से भरे पानी में छोड़ दी जाती हैं। मिट्टी न होने की वजह से न छतों पर भार बढ़ता है। वहीं बिल्कुल अलग सिस्टम होने की वजह से छत में कोई बदलाव भी नहीं करने पड़ते

कैसे बन सकता है गार्डेन

हाइड्रपानिक्स एक पौधों को उगाने का बिल्कुल नया तरीका है और इसे किसान या कारोबारी अलग अलग तरह से इस्तेमाल में ला सकते हैं। वहीं इस क्षेत्र में काम कर रही कई कंपनियां भी आपको शौकिया गार्डन से लेकर कमर्शियल फार्म तक स्थापित करने में मदद कर सकती हैं।

इस बारे में हाइड्रपानिक्स कंपनी ‘हमारी कृषि’ से बात की। कंपनी उपज के लिए तैयार फ्रेम और टावर गार्डेन ऑनलाइन बेच रही है। कंपनी के 2 मीटर ऊंचे टावर में 40 पौधे लगाने की जगह है। कंपनी के मुताबिक करीब 400 पौधे वाले 10 टावर की लागत 1 लाख के करीब है। इस कीमत में टावर, सिस्टम और जरूरी पोषक तत्व शामिल हैं।

कंपनी के मुताबिक अगर सिस्टम को सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो इसके बाद सिर्फ बीज और न्यूट्रिएंट का ही खर्च आता है। ये 10 टावर आपकी छत के 150 से 200 वर्ग फुट एरिया में आसानी से खड़े हो जाएंगे। छोटी जगह पर रखे फ्रेम को नेट शेड और बड़े स्तर पर खेती के लिए पॉली हाउस बनाकर ढकने से मौसम से सुरक्षा मिलती है।

क्या है निवेश और कमाई का गणित

  • कंपनी हमारी कृषि को स्थापित करने वाले अभिषेक शर्मा के मुताबिक ये तकनीक लोगों को रोजगार देने का अच्छा जरिए हो सकती है, क्योंकि परंपरागत कृषि के मुकाबले इसके मार्जिन बेहतर हैं।
  • शर्मा के मुताबिक एक पॉड से साल भर में 5 किलो लेटिस (सलाद पत्ता) की उपज मिल सकी है। ऐसे में 10 टावर यानि 400 पॉड से 2000 किलो सालाना तक उपज मिल सकती है।
  • फिलहाल लेटिस की कीमत भारत में 180 रुपए किलो है, शर्मा के मुताबिक अगर थोक में 100 रुपए किलो भी मिलते हैं तो अच्छी कंडीशन में साल में 2 लाख रुपए की उपज संभव है।
  • वहीं उनके मुताबिक आम स्थितियों में आप आसानी से एक साल में अपना निवेश निकाल सकते हैं। अगले साल रिटर्न ज्यादा होगा क्योकिं आपको सिर्फ रखरखाव, बीज और न्यूट्रिएंट का खर्च ही करना है।
  • यानी आप अपनी छत के सिर्फ 150 से 200 वर्ग फुट के इस्तेमाल से एक साल में ही अपना एक लाख का निवेश निकाल कर प्रॉफिट में आ सकते हैं।

क्यों ये तकनीक है फायदे का सौदा

  • इस तकनीक के जरिए नियंत्रित माहौल में खेती होती है, इसलिए अक्सर किसान हाइड्रपानिक्स की वजह से ऐसे सब्जियों का उत्पादन करते हैं जिसकी मार्केट कीमत ज्यादा होती है।
  • इस तकनीक में पानी, फर्टिलाइजर और कीटनाशक की खपत भी 50 से 80 फीसदी तक घट जाती है।
  • हमारी कृषि में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक इस तकनीक से पैदावार 3 से 5 गुना तक बढ़ जाती है।
  • इस तकनीक में शुरुआती खर्च ज्यादा होता है। हालांकि बाद में लागत काफी कम होने से प्रॉफिट बढ़ जाता है।
  • नेट शेड या पॉलिहाउस की वजह से मौसम का असर इन फसलों पर काफी कम हो जाता है।

कैसे इस तकनीक से खड़ा कर सकते हैं कारोबार

  • इस तकनीक के जरिए अपनी छत पर खुद के लिए ताजी ऑर्गेनिक सब्जियां उगाई जा सकती हैं।
  • वहीं आप इसे अपने कारोबार में बदल सकते हैं। इस्राइल, दक्षिण अफ्रीका और साउदी अरब जैसे देश जहां जगह या पानी की कमी है, वहां ये तकनीक सफल कारोबार में बदल चुकी है।
  • इन देशों में किसान अपने घरों की छत के साथ साथ मॉल, ऑफिस की छतों पर गार्डन स्थापित कर रहे हैं। वहीं कई लोग आपस में मिल कर अपनी-अपनी छतों पर सब्जिया उगा रहे हैं।
  • वहीं आप इस तकनीक को सीख कर अपनी कंपनी स्थापित कर सकते हैं या फिर किसी स्थापित कंपनी के साथ जुड़ कर दूसरे लोगों को उनके ऑर्गेनिक फार्म या गार्डन स्थापित करने में मदद कर सकते हैं।

क्या हैं इस कारोबार में ध्यान देने वाली बातें

  • किसानों को पॉलिहाउस या नेट शेड पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। सिस्टम का खर्च वन टाइम है लेकिन शेड के रखरखाव का खर्च लागत बढ़ा सकता है। खेत जितना बड़ा होगा ये खर्च उतना ज्यादा होगा।
  • वहीं अभिषेक ने साफ कहा कि फसल पर तापमान, कीट जैसी कई बातों का असर पड़ता है। ऐसे में उपज के लिए खेती की बेसिक जानकारी और उस हिसाब से पौधों की देखभाल और बदलाव करने पड़ते रहते हैं।
  • रिटर्न इस बात से निर्भर होता है कि आप जो उगा रहे हैं उसकी क्वालिटी और मार्केट में उसकी कीमत क्या है। बेहतर कीमत के लिए मार्केटिंग स्किल्स भी चाहिए
  • इस काम में खेती से जुड़े अपने जोखिम बने रहते हैं, लेकिन परंपरागत खेती के मुकाबले इसके जोखिम काफी कम हैं और मार्जिन ऊंचा है।

क्यों आए भगवान शिव, महाकाली के पैरों के नीचे?

भगवती दुर्गा की दस महाविद्याओं में से एक हैं महाकाली। जिनके काले और डरावने रूप की उत्पति राक्षसों का नाश करने के लिए हुई थी। यह एक मात्र ऐसी शक्ति हैं जिन से स्वयं काल भी भय खाता है। उनका क्रोध इतना विकराल रूप ले लेता है की संपूर्ण संसार की शक्तियां मिल कर भी उनके गुस्से पर काबू नहीं पा सकती। उनके इस क्रोध को रोकने के लिए स्वयं उनके पति भगवान शंकर उनके चरणों में आ कर लेट गए थे। इस संबंध में शास्त्रों में एक कथा वर्णित हैं जो इस प्रकार है-

दैत्य रक्तबिज ने कठोर तप के बल पर वर पाया था की अगर उसके खून की एक बूंद भी धरती पर गिरेगी तो उस से अनेक दैत्य पैदा हो जाएंगे। उसने अपनी शक्तियों का प्रयोग निर्दोष लोगों पर करना शुरू कर दिया। धीरे धीरे उसने अपना आतंक तीनों लोकों पर मचा दिया। देवताओं ने उसे युद्ध के लिए ललकारा। भयंकर युद्ध का आगाज हुआ। देवता अपनी पूरी शक्ति लगाकर रक्तबिज का नाश करने को तत्पर थे मगर जैसे ही उसके शरीर की एक भी बूंद खून धरती पर गिरती उस एक बूंद से अनेक रक्तबीज पैदा हो जाते।

सभी देवता मिल कर महाकाली की शरण में गए। मां काली असल में सुन्दरी रूप भगवती दुर्गा का काला और डरावना रूप हैं, जिनकी उत्पत्ति राक्षसों को मारने के लिए ही हुई थी। महाकाली ने देवताओं की रक्षा के लिए विकराल रूप धारण कर युद्ध भूमी में प्रवेश किया। मां काली की प्रतिमा देखें तो देखा जा सकता है की वह विकराल मां हैं। जिसके हाथ में खप्पर है,लहू टपकता है तो गले में खोपड़ीयों की माला है मगर मां की आंखे और ह्रदय से अपने भक्तों के लिए प्रेम की गंगा बहती है।

महाकाली ने राक्षसों का वध करना आरंभ किया लेकिन रक्तबीज के खून की एक भी बूंद धरती पर गिरती तो उस से अनेक दानवों का जन्म हो जाता जिससे युद्ध भूमी में दैत्यों की संख्या बढ़ने लगी। तब मां ने अपनी जिह्वा का विस्तर किया।

दानवों का एक बूंद खून धरती पर गिरने की बजाय उनकी जिह्वा पर गिरने लगा। वह लाशों के ढेर लगाती गई और उनका खून पीने लगी। इस तरह महाकाली ने रक्तबीज का वध किया लेकिन तब तक महाकाली का गुस्सा इतना विक्राल रूप से चुका था की उनको शांत करना जरुरी था मगर हर कोई उनके समीप जाने से भी डर रहा था।

सभी देवता भगवान शिव के पास गए और महाकाली को शांत करने के लिए प्रार्थना करने लगे। भगवान् शिव ने उन्हें बहुत प्रकार से शांत करने की कोशिश करी जब सभी प्रयास विफल हो गए तो वह उनके मार्ग में लेट गए। जब उनके चरण भगवान शिव पर पड़े तो वह एकदम से ठिठक गई। उनका क्रोध शांत हो गया। आदि शक्ति मां दुर्गा के विविध रूपों का वर्णन मारकण्डेय पुराण में वर्णित है।

कमाल की है ये पत्थर इकट्ठा करने वाली मशीन,यहाँ से खरीदें

पत्थर किसी भी खेत के लिए सबसे बड़ी समस्या होती है । पत्थरों की वजह से कई बार उपजाऊ जमीन पर भी फसल नहीं उगती है । इस लिए इन पथरों को खेत से हटाना बहुत ही जरूरी है । लेकिन अगर एक एक पत्थर चुन कर निकलना पड़े तो ये बहुत ही मेहनत वाला नामुनकिन सा काम लगता है।

लेकिन अब एक ऐसी मशीन आ गई है जो इस काम को बड़ी आसानी से कर सकती है और वो भी तेज़ी के साथ । इस मशीन को स्टोन पिकर बोलते है । इस मशीन को धीमान एग्रो इंडस्ट्रीज द्वारा त्यार किया गया है । इस मशीन की कीमत लगभग 1 लाख 95 हज़ार है । इस कंपनी के इलवा भी और बहुत सारी कंपनी है जो इस तरह की मशीन त्यार करती है ।

इस मशीन को खरीदने के लिए जा किसी और जानकारी के लिए आप इन नंबर पर संपर्क कर सकते है।Contact: 9803610000 , +91 8968650085.

ये कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

आ गई ऐसी मशीन जो फसल काटने के साथ फसल का बंडल भी बना देगी

अब किसानों को मजदूर ढूंढ़ने में दिक्कत नहीं होगी। क्योंकि अब फसल के बण्डल बनाने के लिए लेबर की जरूरत नहीं रहेगी । फसल काटने के लिए पहले ही मशीन उपलब्ध थी लेकिन अब ऐसी भी मशीन आ गई है जो गेहूं के फसल का बंडल भी बना देगी।

BCS कंपनी की मशीन आ गई है जो गेहूं की फसल काटने के बाद उसका बंडल बांधने का काम भी करती है। इस मशीन के आ जाने से किसानो काफी परेशानियों का समाधान हो जायगा । क्योंकि पहले कंबाइन के काटने से जब वह गेहूं को बिलकुल जड़ के पास से काटती तो थी लेकिन उससे भूसा नहीं मिलता था और किसानो के सामने पशुओं के चारे की समस्या उत्पन्न हो जा रही थी।

अब इस मशीन के आ जाने से कटे हुए गेहूं से पर्याप्त मात्रा में भूसा भी बना सकते है । साथ ही मजदूर खोजने की परेशानी से भी मुक्ति मिल जाएगी। सिर्फ गेहूं ही नहीं यह मशीन गेहूँ , धान ,सोयाबीन ,धनिया, मूंग ,तिल्ली ,चना, मसूर, अलसी, सरसो और हर प्रकार के चारे की फसल काट सकते है ।

इस मशीन की कीमत बाजार में करीब ढाई लाख रुपये है। इसे ट्रैक्टर के बिना चलाया जा सकता है। मशीन में 10.2 हार्सपावर का इंजन बंधा हुआ है। मशीन एक घंटे में करीब एक एकड़ फसल काटकर उसके गट्ठर बांध देती है। जिसके लिए यह सिर्फ 1 लीटर डीज़ल का प्रयोग करती है । इसके 5 गेअर होते है जिसमे 4 आगे के और एक पीछे का होता है ।

अगर आप इसको खरीदना चाहते है तो BCS कंपनी के डीलर से संपर्क कर सकते है ।इसके डीलर भारत के सभी छोटे बड़े शहरों में है और ज्यादा जानकारी के लिए आप इनके हेड ऑफिस जो लुधिआना (पंजाब) में है संपर्क कर सकते है जिनके नंबर नीचे दिए है

Mr. S. K. Bansal + 91 98728 – 74743
Mr. Malkeet Singh Babrah (Head Production & Purchase)
+ 91 98728 – 74745

यह कैसे काम करते है देखने के लिए यह वीडियो देखें

अब जानवर नहीं पहुंचा सकेंगे नुकसान क्योंकि अब पल्स मशीन करेगी फसल की रखवाली

अब किसानों को फसल की रखवाली के लिए रातभर जागने की मजबूरी नहीं रहेगी। न ही फसल को जंगली जानवर नुकसान पहुंचा सकेंगे। फसल रक्षक पल्स मशीन फसलों की सुरक्षा करेगी। यह मशीन पंत विवि के किसान मेले में किसानों के लिए उपलब्ध हो सकेगी।

12 वोल्ट की बैटरी से संचालित इस मशीन के झटकों से हाथी, नील गाय, जंगली सुअर, हिरन, गीदड़, सेही, बंदर, सांड आदि जानवर फसल के करीब नहीं फटक सकेंगे।

खास बात यह है कि इस मशीन के करंट से जानवर या अंजाने में इंसान के छू लेने पर मौत होने जैसी कोई नौबत नहीं आएगी। एक बार फिर बता दे इस से किसी को कोई जानलेवा नुकसान नहीं होता ।

क्योंकि बैटरी का करंट होने के चलते इसमें अर्थिग होने की नौबत नहीं आती है। इस मशीन को घरों या फार्म हाउस के आसपास भी लगाया जा सकता है। जिससे कि बंदर नुकसान न पहुंचा सकें।

ऐसे करती है मशीन काम

छोटी सी इस मशीन को 12 वोल्ट की मशीन से करंट दिया जाता है। इसके बाद इस मशीन को खेतों के चारों ओर लगाए गए क्लच वायर से जोड़ दिया जाता है। तार की कीमत 160 रुपये प्रति किलो है, जबकि एक किलो में 75 मीटर लंबी तार आ जाती है। मशीन की कीमत नौ हजार रुपये है।

ये है मशीन की क्षमता

  • बैटरी एक बार चार्ज करने पर 24 घंटे चलती है
  • यह मशीन एक मिनट में 75 बार झटके देकर फसल की रखवाली करती है।
  • इसके करंट से कोई भी जानवर या आदमी नहीं मरेगा।

और जानकारी के लिए निचे दिए हुए नंबर और पते पर संपर्क करें

Ring Road Chamunda Dham colony,BIJNOR (UTTAR PRADESH)PIN-246701
EMAIL : nidhipulsmachine@gmail.com
Mobile No:9012384699, 8859595976

ये है हाथ से चलने वाली बिजाई मशीन, यहाँ से खरीदें

आप ने ट्रेक्टर के साथ खेत में बिजाई तो बहुत देखी होगी । लेकिन अभी भी बहुत से लोग है जो बैलों से खेती करते है । ऐसे किसान बीज बोने के लिए हाथ से छींटे दे देते है । जिस से फसल अच्छी नहीं होती । ऐसे किसानो के लिए अब बहुत सी कंपनी बिजाई की मशीन बना रही है जो हाथ से चलती है और जो बहुत अच्छी बिजाई करती है ।

आज  हम आपको जिस कंपनी की मशीन दिखने वाले है उस कंपनी का नाम है “ओम एग्रो वर्ल्ड ” । यह कंपनी ट्रेक्टर के साथ चलने वाली बिजाई मशीन तो बनाती ही है साथ में साथ से चलनी वाली बिजाई मशीन भी बनाती है ।

इस मशीन में एक बार में 4 किल्लो बीज डाला जा सकता है । यह मशीन 1 कतार में बिजाई करती है ।इस मशीन का वजन लगभग 12 किलो होता है । ये मशीन नरम और सख्त दोनों प्रकार की मिट्टी पर आसानी से चलती है इसके हेंडल की उचाई किसान अपने हिसाब से ऊपर निचे कर सकता है । इस मशीन की कीमत 5142 रुपये है ।

यह मशीन कैसे काम करती है इसके लिए यह वीडियो देखें

अगर आप इस मशीन की कीमत और दूसरी कोई जानकारी के बारे में जानना चाहते है तो निचे दिए हुए नंबर पर कांटेक्ट करें फ़ोन – +91 804296 4004 ,+91 98815 10419

1 दिन में 3900 गैलन पानी निकालता है यह “पहिया पंप”,वीडियो देखें

भारत में बहुत से किसान चल रहे नाले ,नदी बड़े रजबाहे के करीब रहते हैं, हालांकि, कई कारकों के कारण वह पानी का उपयोग करने में असमर्थ हैं। ऐसे किसानो के लिए पानी की ऊर्जा का उपयोग करने में सक्षम यह अद्भुत पानी पहिया पंप बहुत कामयाब साबित हो सकता है।

इसे पहली बार 1746 में बनाया गया था और अब इसे पुनः निर्मित किया गया है और हल्के और सस्ती आधुनिक सामग्री का उपयोग करके बहुत ही कामयाबी से त्यार किया गया है ।इसका डिजाइन इतना आसान है के इसको कोई भी त्यार कर सकता है ।

वाटर व्हील पंप कैसे काम करता है

इस पानी पहिया पंप का 6 फ़ीट व्यास पहिया होता है , जिसे 1-1/4 इंच के 160 फीट की पॉलीथीन पाइप से त्यार किया जाता है, जो प्रति दिन 40 फीट की दुरी तक 3900 गैलन पानी पहुंचने में सक्षम होती है। पंप को काम करने के लिए कोई ईंधन या बिजली की आवश्यकता नहीं होती है और इसलिए पर्यावरण अनुकूल है।

एक बार जब कुंडली के निचले एक चौथाई हिस्से को पानी में डुबोया जाता है तो पानी के बहाव से पूरे कुंडल घूमती है, तो हवा का एक क्रम बदलता है और पानी पाइप के साथ कुंडली के केंद्र बिंदु की ओर बढ़ना शुरू हो जाता है और इस पंप के केंदर में एक और पाइप लगी होती जिस से हम पानी को काफी दुरी तक लेकर जा सकते है ।

ये पंप कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें