22 एकड़ में आमों का बाग़ लगा कर यह किसान ले रहा प्रति एकड़ 1.75 लाख का मुनाफा

प्रगतिशील किसान बलजिंदर सिंह आम रिवायती खेती से हटकर आम के बाग लगाकर इलाके में काफी पहचान बना चुके हैं और काफी आमदन कमा रहे हैं। रणजीत बाग के रहने वाले किसान बलजिंदर सिंह ने बताया कि बागबानी विभाग के सहयोग से इस क्षेत्र में काफी तरक्की हासिल की है।

उन्होंने बताया कि शुरू में 10-12 एकड़ से शुरू किए इस व्यवसाय को बलजिंदर सिंह ने 22 एकड़ मे तबदील किया और अपनी मेहनत और विभाग के सहयोग से अब वार्षिक एक एकड़ में से 1 लाख 75 हजार रुपए की आमदन प्राप्त कर रहा है। उन्होंने बताया कि बाग लगाकर शुरुआत के दौर में बाग में से आमदन एक पेंशन के रूप में मिलनी शुरू हो जाती है। इसलिए पानी और दवाइयों की अधिक जरूरत नहीं पड़ती है।

उन्होंने बताया कि समय-समय पर विभाग की ओर से दवाइयां आदि उपलब्ध करवाई जाती हैं। वहीं, एक एकड़ बाग लगाने पर राष्ट्रीय बागबानी मिशन के तहत बागबानी विभाग की ओर से 75 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है, जबकि स्प्रे पंप पर 50 प्रतिशत।

वहीं, बागबानी विभाग के डिप्टी डायरेक्टर बलविंदर सिंह व बागवानी अधिकारी प्रितपाल सिंह ने बताया कि किसानों को रिवायती फसलों के चक्कर से बाहर निकालने के लिए फसली विभिन्नता से जोड़ा जा रहा है। दिनों-दिन घटते पानी के स्तर के चलते किसानों को सहायक व्यवसाय अपनाने चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि फसली विभिन्नता संबंधी किसी प्रकार की जानकारी के लिए बागबानी दफ्तर गुरदासपुर संपर्क किया जा सकता है।

यह एक पावर टिलर करता है खेती के 10 तरह के काम

पावर टिलर खेतीबारी की एक ऐसी मशीन है, जिस का इस्तेमाल खेत की जुताई से ले कर फसल की कटाई तक किया जाता है। इस के इस्तेमाल से खेतीबारी के अनेक काम आसानी से किए जा सकते हैं।

तकनीक

इस मशीन से खरपतवार का निबटान, सिंचाई, फसल की कटाई, मड़ाई और ढुलाई का काम भी लिया जाता है। इस के अलावा इस मशीन का बोआई और उस के बाद के कामों में भी खासा इस्तेमाल होता है।

इस तरह के कामों के लिए पहले कई मजदूर खेत में लगाने पड़ते थे, लेकिन पावर टिलर के प्रयोग से कम लागत और कम समय में सभी काम आसानी से खत्म हो जाते हैं।

खासतौर से पहाड़ी इलाकों में खेती के काम के लिए यह मशीन काफी कारगर है।आज अनेक कंपनियां पावर टिलर बना रही?हैं। उन्हीं में से एक वीएसटी शक्ति 130 डि पावर टिलर के बारे में जानकारी दी जा रही है :

वीएसटी शक्ति 130 डि – पावर टिलर

यह वीएसटी शक्ति द्वारा बनाया गया पावर टिलर है। इस से खेतों, बागानों व लाइनों में होने वाली फसलों की गुड़ाई आदि की जाती?है। यह पहाड़ी इलाकों में खेतों की जुताई करने वाला खास यंत्र है।

खासीयत : यह काफी हलका और चेन रहित होता है। यह चलने में बेहद आसान है।इसका आकार 2720 ​​x 865 x 1210 मिमी होता है और वजन (इंजन और ट्रांसमिशन रोटरी के साथ) 405 किलोग्राम होता है। इसका 4 स्ट्रोक सिंगल सिलेंडर इंजन 13HP की पावर पैदा करता है।इसमें आगे के लिए 6 गेअर और रिवर्स के लिए 2 गेअर होते है ।

इस मॉडल की कीमत 165000 के करीब है इसके बाकि मॉडल की कीमत मॉडल के हिसाब से कम जा ज्यादा हो सकती है ।

इस से आप क्या-क्या मशीने चला सकते है वो निचे देखें

आज किसान पावर टिलर के साथ अन्य यंत्रों को जोड़ कर खेती के कई काम आसानी से कर रहे?हैं। यह एक ऐसी खास मशीन है, जिस से अन्य यंत्रों को जोड़ कर खेती के तमाम काम लिए जा सकते हैं।

1.पानी का पंप

Water Pump

2.थ्रेशर

अक्षीय फ्लो थ्रेशर

3.रीपर

काटनेवाला

4.बैल प्रकार इंटर कल्टीवेटर

Bullock Type Inter Cultivator

4.बीज ड्रिल

ये सभी मशीने इस टिलर के साथ जुड़ सकती है किसान अपनी जरूरत के हिसाब से इन में से कोई भी मशीन खरीद सकता है लेकिन हर मशीन की अलग किमत होती है

अधिक जानकारी के लिए Toll Free फोन नंबर : 18004190136 और मोबाइल नंबरों 080 – 28510805 / 06/ 07 व 080 – 67141111 पर बात कर सकते हैं।

यह पावर टिलर कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो भी देखें

किसान ने तैयार की हवा से बिजली बनाने वाली मशीन, 1.50 लाख रुपए का आया ख़र्च

चौथी कक्षा तक पढ़ाई करने वाले मथुरा के एक 36 वर्षीय किसान उदयवीर ने एक ऐसी मशीन बनाने का दावा किया है जो हवा से बिजली बनाएगी। इस खोज के लिए जिले में किसान की तारीफ हो रही है। उदयवीर का कहना है कि उसे इस प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए सरकार से कोई मदद नहीं मिली लेकिन अब भी वह सरकारी मदद की उम्मीद किए हुए हैं।

  • जिले से करीब 45 किलोमीटर दूर छाता क्षेत्र के गांव गढ़ी-डड्डी के रहने वाले उदयवीर ने हवा से बिजली को बानकर दिखाई है। उदयवीर ने बताया कि उसके पिता किसानी के साथ-साथ गांव के ट्रैक्टर को ठीक किया करते थे और मैं उन्हें इस काम को करते हुए देखता रहता था।एक दिन मैं और मेरी पत्नी खेत पर गेंहू काटने गए। जब हम लोग घर वापस आये तो घर आकर देखा की लाइट नहीं है और इन्वर्टर भी डाउन पड़ा था।

मैंने एक छोटी सी मशीन पर अपना काम करना शुरू किया और जैसे जैसे मुझे सफलता मिलती गयी मैंने और बड़ा करने की ठान ली और 2010 से मैंने इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया और 8 साल 7 महीने की कड़ी मेहनत के बाद मैंने एक ऐसी मशीन तैयार कर दी जिससे बिना पानी के बिजली बनाई जा सकती है।

  • इस मशीन को उदय भास्कर इलेक्ट्रिक जनरेशन नाम दिया गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट को बनाते समय उदयवीर की पैर की नशे ब्लॉक हो गईं थी। 2015 में उनका एक पैर डॉक्टर को काटना पड़ा।

कैसे बनती है बिजली

उदयवीर ने बताया की मशीन में चार बैटरी लगी हुई हैं। डीसी से मोटर, मोटर से रोटर और रोटर से अल्टीनेटर में सप्लाई जाती है। जैसे ही ऑक्सीजन बनने लगती है वैसे ही बिजली का बनना भी शुरू हो जाता है।

पूरे दिन में एक व्यक्ति जितनी ऑक्सीजन लेता है उतनी ही मशीन ऑक्सीजन अपने अंदर लेती है लगातार इससे बिजली बनाई जाती है। इस पूरी मशीन को बनाने में 1.50 लाख रुपए खर्च हुआ।

पीएम को भी भेज चुका हूं लेटर

उदयवीर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अपने प्रोजेक्ट के बारे में लेटर लिखकर भेजा है जिसका अभी तक जवाब नहीं आया है।

बहुत ही कमल का है ये आधुनिक थ्रेशर,वीडियो देखें

फसलों की गहाई में मशीन (थ्रेशर) का बड़ा योगदान है। गहाई मशीनों के उपयोग से समय पर गहाई पूरी करके पैदावार की क्षति को जहां काफी हद तक कम किया जा सका है वहीं गहाई का कार्य जो पारम्परिक तरीके से बहुत श्रमसाध्य हुआ करता था, अब बहुत आसान हो गया है।

महीनों तक चलने वाला गहाई का कार्य अब कुछ दिनों में ही सम्पन्न हो जाता है। देश में गहाई मशीनों की संख्या लगभग 25 लाख से ज्यादा है।

यह थ्रेशर कैसे काम करता है उसके लये वीडियो देखें

यह थ्रेशर बहुत ही आधुनिक है और बड़ी ही सफाई से काम करता है ।यह थ्रेशर GS AUTO FEED MULTI CROP THRESHER ,नंदयाल,आंध्रा प्रदेश द्वारा त्यार किया गया है ।

इस थ्रेशर की सहयता से विभिन्न फसलों जैसे सोयाबीन, मक्का, ज्वार, बाजरा आदि तथा तिलही व दलहनी फसलों जैसे अलसी, सरसों, मूंग, चना, उड़द आदि की गहाई की जाती है।

अगर आप इस मशीन की कीमत और दूसरी जानकारी चाहिए तो निचे दिए हुए नंबर पर संपर्क करें 9010889900 ,9010801581 ,9849751998

महिंद्रा ने भारत में पेश किया पहला चालक रहित ट्रैक्टर,अब घर बैठकर होगी खेती

ऑटोमोबाइल कंपनी महिन्द्रा ने भारत में पहली बार ड्राइवरलेस (चालक रहित) ट्रैक्टर को लॉन्च किया है। ड्राइवरलेस ट्रैक्टर को लेकर महिन्द्रा एंड महिन्द्र कंपनी ने कहा, यह ड्राइवरलेस ट्रैक्टर दुनिया भर के किसानों को ध्यान में रखते हुए लांच किया गया है।

कंपनी के बयान के मुताबिक इस ट्रैक्टर को चेन्नई में स्थित ग्रुप के इनोवेशन और टेक्नोलॉजी हब महिन्द्रा रिसर्च वैली में विकसित किया गया है। यह ड्राइवरलेस ट्रैक्टर वैश्विक किसानों के लिए मशीनीकरण की प्रक्रिया को फिर से परिभाषित करने के लिये पूरी तरह से तैयार है। कंपनी का दावा है कि यह इस नई तकनीक से कृषि के भविष्य में बड़ा बदलाव आएगा।

महिन्द्रा एंड महिन्द्रा लिमिटेड के अध्यक्ष (फॉर्म इक्विपमेंट सेक्टर) राजेश जेजुरिकर ने कहा, ‘वर्तमान में कृषि संबंधित मशीनों की जरूरत पहले से बहुत ज्यादा है। मजदूरों की कमी और उत्पादकता और कृषि उत्पादित क्षेत्रों को बेहतर बनाने की जरूरत इसका प्रमुख कारण हैं।

हमने पिछले साल अपनी ‘डिजिसेंस’ टेक्नोलॉजी को लॉन्च किया था और अब चालक रहित ट्रैक्टर की पेशकश कर रहे हैं। इनके जरिए भारतीय किसानों को ट्रैक्टर के लिए इंटेलीजेंस के बेमिसाल स्तर को पेश किया जाएगा।’

टैबलेट के जरिए कंट्रोल

ट्रैक्टर में जियोफेंस लॉक लगा हुआ है जो इसे खेत की मेंढ़ के अंदर बने रहने में मदद करता है, ट्रैक्टर को टैबलेट की मदद से दूरदराज के इलाकों में कंट्रोल किया जा सकता है। ट्रैक्टर में जीपीएस आधारित ऑटोस्टीर टेक्नोलॉजी लगी हुई है जो इसे एक सीधी लाइन में चलने में मदद करती है।

इसमें एक ऑटो लिफ्ट भी लगी हुई है जो खेती के समय औजारों को अपने आप खेत जोतने के लिए नीचे कर देगी और काम पूरा होने के बाद औजारों को अपने आप ऊपर उठा लेगी। बिना ड्राइवर के खेत जोतने के लिए ट्रैक्टर में कई तकनीक को इस्तेमाल किया गया है।

फीचर और इंजन

महिंद्रा के इस ट्रैक्टर में 20 हॉर्सपॉवर से 100 हॉर्सपॉवर ताकत वाले इंजन के साथ लांच कर सकती है। यह ट्रैक्टर ड्राइवरलेस तकनीक को ध्यान में रखकर बनाया गया है। फीचर के चलते ग्राहकों को जीपीएस बैसेड तकनीक पर ऑटोस्टीयर दिया है। जिसके कारण ट्रैक्टर सीधी लाइन में चलता है। इसके अलावा ऑटो हैंडलेड टर्न का भी फीचर दिया है। जो ट्रैक्टर को मोड़ने में मदद करता है।

वीडियो भी देखें

मोदी सरकार ने किसानों को दी सबसे बड़ी खुशखबरी, इतने रुपये बड़े खरीफ फसलों के दाम

बुधवार को सरकार ने किसानों के हक में फैसला लिया है। धान, दाल, मक्का जैसी खरीफ की फसलों पर मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) बढ़ाने पर कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। सरकार का उद्देश्‍य है कि किसानों को अनाज के उत्पादन लागत पर ज्यादा मुनाफा मिल सके।

सबसे ज्यादा एमएसपी 52.5 फीसदी रागी पर बढ़ाया गया है। वहीं, धान की एमएसपी 200 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ी है। बता दें कि सरकार ने पिछले बजट में किसानों से एमएसपी बढ़ाने का वादा किया था। माना जा रहा है कि इससे केंद्र पर 33500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा।

52.57 फीसदी तक बढ़ी MSP

रागी पर सबसे ज्यादा 52.57 फीसदी एमएसपी बढ़ाई गई है। इसके अलावा ज्वार पर 42 फीसदी एमएसपी बढ़ाई गई है। बाजरे पर 36.8 फीसदी एमएसपी बढ़ाई गई है। तुअर की एमएसपी 4.1 फीसदी, उड़द की एमएसपी 3.7 फीसदी और मूंग की एमएसपी 2.5 फीसदी बढ़ाई गई है।

फसल नई MSP (rs प्रति क्विंटल) पुरानी MSP (rs प्रति क्विंटल) कितना बढ़ा (%)

दूसरे अनाज उत्पादकों को भी फायदा

हाल ही में जारी कैबिनेट नोट के मुताबिक, एमएसपी का अतिरिक्त खर्च जीडीपी का 0.2 फीसदी है। अतिरिक्त खर्च में धान की हिस्सेदारी 12300 करोड़ रुपए होगी।

एफसीआई सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से वितरण के लिए केवल गेहूं और चावल खरीदता है, इसलिए सरकार एक नई व्यवस्था स्थापित करना चाहती है ताकि यह तय किया जा सके कि अन्य फसलों के एमएसपी में बढ़ोत्तरी का लाभ भी किसानों तक पहुंचे।

नई खरीद नीति क्यों थी जरूरी

दाल, तिलहन और कॉटन की खरीद प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत होती है, लेकिन इसमें कई खामियां बताई गईं। मौजूदा समय में किसानों को मूंगफली, सोयाबीन, रागी, मक्का, बाजरा और ज्वार सहित 23 अधूसूचित फसलों पर दाम एमएसपी से कम मिल रहा है। इन उत्पादों की खरीद पर सरकार संबंधित एजेंसियों को हो रहे नुकसान की भी भरपाई करेगी।

ये है बैलों से चलने वाला ‘पंचाल पंप’, एक घंटे में निकालता है 25 हजार लीटर पानी

बिजली संकट, डीजल के बढ़ते मूल्य, रासायनिक खादों से बंजर होती खेती, जमीन की घटती उर्वरा शक्ति ने खेती पर संकट खड़ा कर दिया है। काफी लंबे समय तक शोध और प्रयोगों के बाद खेती बिना बिजली, डीजल खर्च के कृषि आधारित सभी कामों के लिए एनीमल एनर्जी (पशु शक्ति) से चलने वाले स्क्रू पंप का अविष्कार कर तमाम झंझावातों से जूझ रहे किसान को नया मुकाम मिल गया है।

यह सब साकार किया है कि मलवां ब्लाक के मुरादीपुर गांव के रहने वाले पुरुषोत्तम लाल शर्मा ने। मैकेनिकल ट्रेड से इंजीनियर श्री शर्मा ने बिजली संकट, डीजल के संकट को देखते हुए वर्ष 2003-04 में बगैर पैसे के खेती प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। बकौल श्री शर्मा महाराष्ट्र में खेती और किसानी के लिए काम करने वाले सुभाष पाले से उनको इस क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा मिली।

एनीमल एनर्जी के उपयोग को लेकर पांचाल पंप सिस्टम तैयार किया। यह एक ऐसा पंप है जिसे बैल, ऊंट, खच्चर चरखी की तरह खीचते हैं। पंप जमीन की सतह पर लगाया जाता है। इसके बाद इसी से चारा कटाई, आटा चक्की, धान थ्रेसरिंग, गेहूं थ्रेसरिंग, ग्राडिंग मशीन आदि चलती है जो एक हार्स पावर क्षमता की हो, बैट्री चार्जिग भी की जा सकती है।

डीजल, बिजली बिल, पेट्रोल का कुछ खर्च नहीं है। पंप से एक घंटे में 25 हजार लीटर पानी निकलता है। माडल के तौर पर यह पंप (पूरा सिस्टम) महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, झारखण्ड, बिहार के अलावा अमेरिका के फ्लोरिडा व अफ्रीका में चल रहे हैं।

आईआईटी कानपुर, लखनऊ, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय रूटक (रूरल टेक्नालॉजी एक्शन ग्रुप) ने अप्रूव्ड कर दिया है। इस अविष्कार के चलते ही आईसीएआर भारत सरकार (इंडियन काउंसिल एग्रीकल्चर रिसर्च) का सदस्य बनाया गया है। गांव में भी बिन पैसे खेती का बड़ा माडल तैयार कर रहे हैं।

यह पंप कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

यह पंप को खरीदने के लिए आप निचे दिए हुए पते और नंबर पर संपर्क कर सकते है

Address: Panchal Pumps & Systems,
F-77, Udyougkunj, Road No. 7, Site – 5 Panki Industrial Area, Kanpur – 208022, Uttar Pradesh, India
Call Us: 08079452237
Send SMS Mobile:+91-9451447491, +91-7852090091
Telephone:+91-512-2233631, +91-512-2071807
Website: http://www.panchalpumps.com/

ये है बिना ट्रेक्टर से स्प्रे करने वाली मशीन,बहुत कम खर्च में करती है स्प्रे

किसनो की फसलों को कीटों और बीमारीओं से बचाने के लिए बार बार होने वाले स्प्रे में आने वाली परेशानियों को देखते हुए अब एक नई मशीन स्प्रे बनाई गई है | इस मशीन का नाम है टेक्नोस आज कल स्प्रे करने के लिए छोटे ट्रेक्टर का उपयोग किया जाता है | जिसकी कीमत 3-4 लाख होती है साथ में उस ट्रेक्टर की संभाल के लिए भी खर्च करना पड़ता है और छोटे ट्रेक्टर से स्प्रे करने के लिए मेड से मेड की दुरी भी कम से कम 8 फ़ीट करनी पड़ती है | जिस से उत्पादन कम आता है और किसानो को नुकसान उठाना पड़ता है |

लेकिन अब इस नई मशीन आ गई जिसमे मेड की दुरी 6.5 फ़ीट रख कर भी स्प्रे की जा सकती है | इस मशीन में हौंडा का इंजन लगा हुआ है | इस लिए इसमें आपको अलग से ट्रेक्टर लेने के जरूरत नहीं है जिसमे 2 आगे के गेयर और एक पीछे का गेयर है | इसमें इस्तमाल होने वाली टंकी की कैपेसिटी 200 लीटर है इसमें लगा हुआ ब्लोअर इतना जबरदस्त है के पेड़ की हर शाखा पर स्प्रे पहुंचा देता है इस मशीन की कीमत लगभग 85000 रुपये है |

जो किसान बाग़ लगते है उनके लिए ये मशीन बहुत कारगर है | अगर आप इस मशीन को खरीदना चाहते है तो निचे दिए हुए नंबर पर सम्पर्क कर सकते है |

मोबाइल नंबर 096858 60720

 

88 साल की उम्र में भारतीय कि‍सान ने खरीदी Mercedes-Benz, पूरा कि‍या बचपन का सपना

आप अपनी सपनों की कार के लि‍ए क्या 80 साल तक इंतजार कर सकते हैं। शायद नहीं लेकिन भारत के एक किसान ने ऐसा किया है। तमि‍लनाडु के कि‍सान एच. देवराजन (उम्र 88 साल) ने हाल ही में मर्सडीज-बेंज बी-क्‍लास को खरीदा है।

लग्‍जरी कार ब्रांड के डीलरशि‍प नेटवर्क मर्सडीज-बेंज ट्रांस कार इंडि‍या ने एच. देवराजन के बारे में वीडि‍यो यूट्यूब पर जारी किया है। देवराजन ने कहा कि‍ जब वह 8 साल के थे तब उन्‍होंने पहली बार इस ब्रांड को देखा था और तभी से वह इससे प्‍यार करने लगे।

ब्रांड का नाम नहीं जानते थे

देवराजन ने कहा कि‍ मैं साइकि‍ल से चलता था। जब मैं आठ साल का था, तब मैंने पहली बार मर्सडीज-बेंज कार देखी। मैं ब्रांड का नाम नहीं जानता चाहता था, लेकि‍न मुझे उसके logo से प्यार हो गया। अपने 16 भाई-बहनों में अकेले वहीं हैं जि‍न्‍होंने अपने सपने को पूरा कि‍या। उन्‍होंने कहा कि‍ मेरा सपना पूरा हो गया।

मर्सडीज के logo का केक

ट्रांस कार इंडि‍या के स्‍टाफ ने उनके ‘लाइफटाइम अचि‍व्‍मेंट’ को सेलिब्रेट करने के लि‍ए आईकॉनि‍क मर्सडीज logo के साथ केक भी दि‍या। देवराजन ने कहा कि‍ मैं अपनी पत्‍नी के 100 फीसदी सपोर्ट का कर्जदार हूं। मैं ट्रांस कार इंडि‍या की टीम के सपोर्ट का भी शुक्रि‍या अदा करता हूं।

मर्सडीज-बेंज बी-क्‍लास के बारे में

मर्सडीज-बेंज बी-क्‍लास एमपीवी और हैचबैक के बीच की क्रॉसओवर व्‍हीकल है, जो कि‍ ज्‍यादातर भारतीय परि‍वारों की जरूरतों को पूरा करती है। यह ऊंची डि‍जाइन के साथ हाई रूफ वाली कार है जि‍समें आसानी से उम्रदार लोग बैठ सकते हैं। साथ ही, इसके काफी स्‍पेस भी मि‍लता है।

तमि‍लनाडु में बी-क्‍लास की एक्‍स-शोरूम कीमत 32 लाख रुपए से शुरू होती है। यह कार पेट्रोल और डीजल दोनों इंजन ऑप्‍शन के साथ बेची जाती है। यह कार केवल ऑटोमैटि‍क ट्रांसमि‍शन के साथ ही आती है।

ये है हाथ से चलने वाली बिजाई मशीन, यहाँ से खरीदें

आप ने ट्रेक्टर के साथ खेत में बिजाई तो बहुत देखी होगी । लेकिन अभी भी बहुत से लोग है जो बैलों से खेती करते है । ऐसे किसान बीज बोने के लिए हाथ से छींटे दे देते है । जिस से फसल अच्छी नहीं होती । ऐसे किसानो के लिए अब बहुत सी कंपनी बिजाई की मशीन बना रही है जो हाथ से चलती है और जो बहुत अच्छी बिजाई करती है ।

आज  हम आपको जिस कंपनी की मशीन दिखने वाले है उस कंपनी का नाम है “ओम एग्रो वर्ल्ड ” । यह कंपनी ट्रेक्टर के साथ चलने वाली बिजाई मशीन तो बनाती ही है साथ में साथ से चलनी वाली बिजाई मशीन भी बनाती है ।

इस मशीन में एक बार में 4 किल्लो बीज डाला जा सकता है । यह मशीन 1 कतार में बिजाई करती है ।इस मशीन का वजन लगभग 12 किलो होता है । ये मशीन नरम और सख्त दोनों प्रकार की मिट्टी पर आसानी से चलती है इसके हेंडल की उचाई किसान अपने हिसाब से ऊपर निचे कर सकता है । इस मशीन की कीमत 5142 रुपये है ।

यह मशीन कैसे काम करती है इसके लिए यह वीडियो देखें

अगर आप इस मशीन की कीमत और दूसरी कोई जानकारी के बारे में जानना चाहते है तो निचे दिए हुए नंबर पर कांटेक्ट करें फ़ोन – +91 804296 4004 ,+91 98815 10419