पराली से ऐसे करें कमाई , सरकार भी करेगी मदद

पुआल फायदेमंद भी है। एक टन पराली में 5.50 किलो नाइट्रोजन, 2.3 किलो फॉस्फोरस, 1.30 किलो सल्फर और 25 किलो पोटैशियम होता है। इससे गैस प्‍लांट भी बन सकता है जिससे खाना बनाना और गाड़ी चलाना संभव है। गैस के अलावा खाद भी बन सकती है, जिसकी बाजार में कीमत 5,000 रुपए प्रति टन है। इस तरह किसान पराली प्रबंधन कर उसे खाद व गैस बनाकर अपनी आमदनी का जरिया भी बना सकते हैं।

इन तरीकों से होता है पराली का निपटान

  • मलचिंग- धान के बचे हिस्से को मशीन से बाहर निकाल कर खेतों में छोड़ दिया जाता है। वह गलकर खाद का काम करते हैं।
  • पराली चार- मिट्टी और ईट के बने छोटे से घर में पराली भरकर जलाई जाती है। इस दौरान जमा हुई कालिख को मिट्टी में मिलाने से उर्वरा शक्ति बढ़ती है।
  • पराली से बने पेलेट- थर्मल पावर प्लांट में पराली से बने पेलेट कोयले के साथ जलाए जाते हैं। एनटीपीसी ने पेलेट की खरीदारी के लिए टेंडर भी निकाल दिया है।

पराली निपटान में सरकार कैसे करती है मदद

पराली प्रबंधन की मशीनें खरीदने के लि‍ए सरकारी की ओर से 80 फीसदी तक की आर्थि‍क मदद दी जाएगी। यही नहीं कृषि अवशेष न जलाने वालों को इनाम भी दि‍या जाएगा। इस साल मार्च में कैबिनेट ने पंजाब, हरियाणा , उत्‍तर प्रदेश और राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली में फसल अवशेषों के निपटान के लिए कृषि मशीनरी प्रोत्‍साहन को अपनी स्‍वीकृति दे दी है। इसके लि‍ए 1151.80 करोड़ रुपए मंजूर कि‍ए।

कैसे मि‍लेंगे पैसे

संबंधित राज्‍य सरकारें जिला स्तरीय कार्यकारी समितियों (डीएलईसी) के माध्यम से विभिन्न लाभार्थियों और स्थान- कृषि प्रणाली पर निर्भर विशेष कृषि उपकरण की पहचान करेगी और कस्टम हायरिंग और व्यक्तिगत मालिक स्वामित्व के आधार पर मशीनों की खरीद के लिए कृषि मशीनरी बैंक स्थापित करने के लिए लाभार्थियों की पहचान और चयन करेगी ताकि पारदर्शी रूप से समय पर लाभ प्राप्त किए जा सकें।

राज्‍य नोडल विभाग/ डीएलइसी लाभार्थी की ऋण आवश्‍यकता के लिए बैंकों के साथ गठबंधन करेंगे। चयनित लाभार्थियों के नाम एवं विवरण जिला स्‍तर पर दस्‍तावेजों में शामिल किए जायेगें जिसमें उनके आधार/यूआईडी नम्‍बर तथा प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण के माध्‍यम से दी गई वित्‍तीय सहायता दिखाई जाएगी।

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