मटर के साथ ऐसे कर सकते है गेहूं की खेती ,दोगुना होगा मुनाफा

उत्तर प्रदेश के सैकड़ों किसान सहफसली खेती करके लाभ कमा रहे हैं। इससे फसलों की संख्या बढ़ जाती है। लागत भी कम आ रही है। इस दौरान कई क्षेत्रों में मटर के साथ गेहूं खूब देखा जा सकता है।

कन्नौज से करीब आठ किमी दूर मानीमऊ निवासी 18 वर्षीय शैलेंद्र कुमार बताते हैं, ‘‘मटर के साथ गेहूं किया है। मटर उखड़ने को है। गेहूं 20 दिन का हो चुका है। साथ में फसल करने से पानी बचता है। खेत खाली नहीं रहता। जुतौनी व खाद का खर्च भी बच जाता है।’’

एक तरीके से यह लाभकारी है। मटर की 60-65 दिन में तुड़ाई षुरू हो जाती है। 100-110 दिन में खत्म हो जाती है।मटर जब बोया जाता है तो पहला पानी लगाने के दौरान गेहूं छिड़क दिया जाता है।मटर के दौरान ही साथ में गेहूं करने से बुवाई बचती है। खेत तैयार करने, सिंचाई और लेवर खर्च बच जाता है।

लेकिन मटर के बाद गेहूं बोने से विलम्ब हो जाता है। जिसके कारण गेहूं की उतनी पैदावार भी नहीं हो पाती है और साथ में 20-25 फीसदी उत्पादन कम होता है।

समय रहते बुवाई से एक हेक्टेयर में 35-36 क्विंटल गेहूं निकलता है। नही तो 30-35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन होगा। मटर के बाद जनवरी में गेहूं करने से उत्पादन कम मिलेगा। खाली गेहूं समय से करने पर 40-45 क्विंटल गेहूं निकलता है। मटर में उर्वरक ज्यादा पड़ता है, इसलिए सहफसल में नहीं पडे़गा।

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