पालीहाउस तकनीक से मिलता है दोगुने से भी ज्यादा प्राफिट

किसान अब खेती में नई-नई टेक्नीक का इस्तेमाल करके अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। महासमुंद जिले के छपोराडीह गांव के 39 वर्षीय किसान गजानंद पटेल ही पॉली हाउस की खेती से काफी मुनाफा बढ़ा चुके हैं। इन्होंने फल और सब्जी की खेती से 4 एकड़ जमीन पर 40 लाख रुपए तक की सालाना कमाई की।

जबकि पहले ये महज 80 हजार रुपए सालाना कमा पाते थे। यह फायदा उन्हें पॉलीहाउस के कारण मिला। हम एग्रीकल्चर में आ रही नई टेक्नोलॉजी की सीरीज चला रहे हैं। इसमें हम नई-नई टेक्नोलॉजी की जानकारी आपको देंगे। आज जानिए पॉलीहाउस क्या होता है? और इसे आप कैसे कर सकते हैं?

क्या है पॉलीहाउस खेती

यह जैविक खेती का ही हिस्सा है। पॉलीहाउस में स्टील, लकड़ी, बांस या एल्युमीनियम की फ्रेम का स्ट्रेक्चर बनाया जाता है। खेती वाली जमीन को घर जैसे आकर में पारदर्शी पॉलीमर से ढक दिया जाता है। पॉलीहाउस के अंदर न बाहर की हवा जा सकती है न पानी। इस कारण कीड़े-मकोड़े का असर नहीं होता। टेंपरेचर भी जरूरत के मुताबिक कम-ज्यादा किया जाता है।

इस तरह मौसम पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाती है। कीटनाशक, खाद, सिंचाई ये सभी काम पॉलीहाउस के अंदर होते हैं। जो जितना जरूरी हो उतना ही डाला जाता है। सबकुछ नपा-तुला मिलने के कारण यह भी तय हो जाता है कि किस तारीख को कितनी फसल मिलेगी।

क्या है पॉलीहाउस खेती की खासियत

  •  पॉलीहाउस खेती में बिना मौसम की सब्जियां, फूल और फल उगाए जा सकते हैं।
  • इसमें पानी ड्रिप सिस्टम द्वारा दिया जाता है। इससे पारंपरिक खेती के मुकाबले पानी बहुत कम लगता है।
  • पारंपरिक खेती के बजाए इसमें लॉन्ग ड्यूरेशन तक फसल ली जा सकती है।
  • फसलों की गुणवत्ता भी अच्छी होती है।

कैसे कर सकते हैं पॉलीहाउस खेती

  • गवर्नमेंट पॉलीहाउस खेती करने पर सब्सिडी दे रही है।
  • आपको अपने जिले के कृषि विभाग में इसके लिए अप्लाई करना होगा।
  •  कृषि विभाग से अप्रूवल मिलने के बाद विभाग ही पॉलीहाउस के लिए नियुक्त कंपनी को किसान के पास भेजता है। (राज्यों के हिसाब से स्कीम अलग-अलग)

गवर्नमेंट देती है सब्सिडी

  • कंपनी पॉलीहाउस तैयार करती है। इसका 85 परसेंट बर्डन गवर्नमेंट और 15 परसेंट किसान को उठाना होता है।
  • पॉलीहाउस में टमाटर, ककड़ी, शिमला मिर्च, गोभी जैसी सब्जियां उगाई जा सकती हैं।

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