इस तकनीक से बिना फ्रिज और केमिकल से 9 महीने तक दूध नहीं होता है खराब

दूध को लेकर हमारी मां कुछ ज्यादा ही चिंता में रहती है।  दूध को फ्रिज में संजोकर रखा जाता है, बार-बार गर्म किया जाता है। पर क्या आपने कभी सोचा है आखिर दूध को लेकर इतना सतर्क क्यों रहते हैं?

दरअसल दूध में कई बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जिसके चलते उसे पीने योग्य बनाए रखने के लिए ये सारे जातन किए जाते हैं। अगर ऐसा न किया जाए तो दूध खराब हो जाता है।

अब भारत के हर गांव-कस्बे में तो फ्रिज है नहीं, जिसके चलते हमारे देश में कई टन दूध वेस्ट हो जाता है। दूसरी ओर दूध को बड़े शहरों तक पहुंचाने में हर दिन हजारों-लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं।

आखिर कौन-सी है ये तकनीक और किस तरह देश में दूध की क्रांति को बढ़ावा दे सकती है चलिए जानते हैं।

अल्ट्रा हाई टेम्परेचर प्रोसेसिंग

अल्ट्रा हाई टेम्परेचर प्रोसेस या ultra-pasteurization नाम की तकनीक दूध को लंबे समय तक बिना फ्रिज के स्टोर करने में मदद करती है। इस तकनीक में दूध को काफी हाई टेंपरेचर पर गर्म किया जाता है और फिर एकदम ठंडा किया जाता है। इसके बादि प्रोसेस्ड मिल्क को हर्मेटिकली सील्ड कंटेनर में बंद कर देते हैं। इससे दूध में मौजूद सभी बैक्टीरिया एक ही बार में खत्म हो जाते हैं।

6-9 महीनों तक नहीं होता खराब 

इस तरह प्रोसेस किए गए दूध की खासियत होती है कि वो लगभग 6 से 9 महीनों तक खराब नहीं होता। न ही इसे फ्रिज में रखने की जरुरत होती है यानी हर्मेटिकली सील्ड डिब्बे में बंद दूध को फ्रिज के बाहर ही कई महीनों तक रखा जा सकता है।

फ्रांस में प्रसिद्ध है ये तकनीक 

कहा जाता है कि इस तकनीक का ईजाद 70 के दशक में कर लिया गया था। और तभी से कुछ देशों में इसका उपयोग जारी है। आज फ्रांस में उपयोग किए जाने वाले दूध का लगभग 95% भाग अल्ट्रा हाई टेम्परेचर प्रोसेसिंग की मदद से स्टोर किया जाता है।

इस तरह हो सकती है भारत के लिए उपयोगी 

यूरोप की तरह ही भारत में भी ये तकनीक काफी मददगार हो सकती है। जैसा कि हमने ऊपर बताया इस तकनीक की मदद से स्टोर किया गया दूध कई महीनों तक खराब नहीं होता। तो जिन गांवों में फ्रिज या बिजली की समस्या हो वहां ये तकनीक काफी उपयोगी होगी। साथ ही मेट्रो सिटी में एक साथ कई दिनों का स्टाक पहुंचाकर, हर दिन दूध भेजने की ट्रांस्पोर्टेशन कॉस्ट कम की जा सकती है।

अभी क्या है भारत का हाल

फिलहाल भारत में सबसे ज्यादा यूएचटी दूध कर्नाटक राज्य में बिकता है। इसके बाद महाराष्ट्र और तमिलनाडु में इसकी बिक्री अधिक है। रिसर्च के अनुसार, पिछले कुछ सालों के मुकाबले 2017 में इसकी मांग बढ़ी है और 2023 तक भारत में यूएचटी मिल्क का मार्केट लगभग 156 बिलियन (15,600 करोड़ रुपयें) का हो सकता है।

 

सही तरह से विज्ञापन करने की जरुरत

आंकड़ों की मानें तो भारत में यूएचटी मिल्क की बिक्री धीरे-धीरे बढ़ रही है, लेकिन अधिकांश लोग इसकी उपयोगिता से अनजान हैं। अभी देश की ज्यादातर जनता इसे मात्र पैकेट वाले दूध के रूप में जानती है। ऐसे में लोगों को इस तकनीक के असल उपयोग और फायदों से अवगत करवाने की जरुरत है।

टेस्ट को लेकर कही जाती है ऐसी बातें 

हाई टेंपरेचर पर प्रोसेस्ड किए गए दूध के स्वाद को लेकर लोगों के बीच दो मत पाए जाते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि इसका स्वाद नार्मल दूध से काफी अलग होता है, वहीं कुछ लोगों के अनुसार दूध के स्वाद में कोई अंतर नहीं होता।

चाहे जो भी हो लेकिन दूध स्टोर करने की ये प्रोसेस निश्चित ही भारत के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी। इससे दूध के वेस्टेज को तो कम किया ही जा सकता है, साथ ही साथ पैसों की बचत भी संभव है।

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