पंजाब बना चन्दन की खेती का हब, 30 रुपये का मिलता है पौधा , प्रति एकड़ होती है एक करोड़ तक की कमाई

दक्षिण भारत का एकाधिकार तोड़ अब पंजाब चंदन हब बनने की राह पर है। इसके लिए होशियारपुर का वन विभाग अग्रणी भूमिका अदा कर रहा है। होशियारपुर में स्थापित 1 लाख पौध की नर्सरी से चंदन के पौधों की सप्लाई हो रही है। वो दिन दूर नहीं जब धीरे-धीरे सूबा चंदन की खुशबू से महकेगा।

होशियारपुर से न केवल पंजाब के अन्य जिलों बल्कि पड़ोसी राज्यों हिमाचल प्रदेश, हरियाणा को भी पौधे सप्लाई हो रहे हैं। पंजाब चंदन की खेती के लिए हिमाचल प्रदेश का गुरु साबित होने जा रहा है। चंदन की खेती से किसान लाखों-करोड़ों रुपए कमा सकते हैं। इसकी खेती से सूबे में चंदन से संबंधित उद्योग भी प्रफुल्लित होगा।

पंजाब के उद्योग आैर वाणिज्य मंत्री सुन्दर शाम अरोड़ा ने कहा कि पंजाब सरकार चंदन से संबंधित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है आैर करती रहेगी। उन्होंने कहा कि जहां किसान चंदन की खेती के साथ आर्थिक तौर पर मजबूत होंगे, वहीं उद्योग और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

क्योंकि चंदन के तेल का दवा, धूप, अगरबत्ती, साबुन, परफ्यूम आदि में प्रयोग होता है। उन्होंने कहा कि उनके विभाग की तरफ से चंदन की प्रोसेसिंग के लिए उद्योग आैर चंदन उत्पादों की मार्केटिंग के लिए विशेष व्यापारिक सुविधाएं मुहैया करवाने जैसे कदम उठाए जाएंगे ताकि पंजाब चंदन की खेती और चंदन उत्पाद में अग्रणी प्रदेश बन सके।

चंदन का जनक बना कंडी क्षेत्र …तलवाड़ा, जनौड़ी और होशियारपुर स्थित वन विभाग की नर्सरियों में तैयार किए जा रहे चंदन के पौधे

डिप्टी कमिश्नर ईशा कालिया ने बताया कि इस समय तलवाड़ा, जनौड़ी और होशियारपुर स्थित वन विभाग की नर्सरियों में चंदन के पौधे तैयार किए जा रहे है। एक पौधे की कीमत 30 रुपए रखी गई है ताकि किसानों पर इन्हें लेने पर आर्थिक बोझ न पड़े।

विभाग की तरफ से अब तक 15 हजार से अधिक पौधे फाजिल्का, अबोहर, मुक्तसर, जालंधर, मोगा और हिमाचल प्रदेश सहित प्रदेश के अलग-अलग जिलों में सप्लाई किए गए हैं। विभाग के पास करीब सवा लाख चंदन के पौधे तैयार हैं। होशियारपुर के गांव बिछोही के प्रगतिशील किसान कमलजीत सिंह रंधावा ने 100 पौधे लगाए हैं और वह फसली चक्र में फंसे बाकी किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बने हैं।

प्रति हेक्टेयर चंदन के करीब 532 पौधे लगाए जा सकते हैं

डीएफओ कुलराज सिंह ने बताया कि प्रति हेक्टेयर चंदन के करीब 532 पौधे लगाए जा सकते हैं। एक पौधे के साथ 20 किलो अंदरुनी लकड़ी (हार्टवुड) मिलती है और 7वें साल में हार्टवुड तैयार होनी शुरू हो जाती है। यह लकड़ी बाजार में 4 से 8 हजार रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक जाती है।

चंदन के पौधे से चार साल बाद ही बीज मिलने शुरू हो जाते हैं, जिससे किसान की अच्छी आय हो जाती है। करीब 14 साल तक इसकी अंदरूनी लकड़ी तैयार हो जाती है और इससे किसान प्रति हेक्टेयर 2.25 करोड़ तक आय ले सकता है।

चंदन का तेल करीब पौने तीन लाख रुपए लीटर बिकता है। चंदन की अंतरराष्ट्रीय बाजारा में भी काफी मांग है। वन विभाग की ओर से न सिर्फ किसानों को चंदन के पौधे दिए जा रहे हैं बल्कि इसकी खेती की जानकारी भी दी जा रही है ताकि इसकी खेती को कामयाब बनाया जा सके।

दूसरे पौधों से लेता है खुराक, 14 साल लगते हैं तैयार होने में, पेड़ की कीमत करीब डेढ़ लाख

डीसी ईशा कालिया ने बताया कि चंदन का पौधा लगभग 14 साल में तैयार हो जाता है। इस समय चंदन के पेड़ की कीमत करीब डेढ़ लाख रुपए तक है। चंदन के पौधे की खास बात यह है कि यह पैरासाइटिक प्लांट है। भाव यह कि यह अपनी खुराक दूसरे पौधे से लेता है।

इसको तैयार होने में समय लगता है, इसलिए किसान इसके साथ-साथ डेक, आम, आंवला लगा सकते हैं। कम समय के अंतराल में किसानों को आय शुरू हो जाती है। उन्होंने कहा कि सूबे में वन क्षेत्र बढ़ाने में किसान सहयोग दे सकते हैं। इसके साथ ही उन्हें इससे आया का अतिरिक्त साधन मिलेगा।

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