राजस्थान के किसान भी करने लगे केसर की खेती ,सरकार से माँगा सहयोग

जम्मू-कश्मीर जैसे ठंडे प्रदेश में पनपने वाली केसर की खेती शेखावाटी के धोरों में भी होने लगी है। केसर का जायका थोड़ा कड़वा जरूर होता है, लेकिन यही केसर शेखावाटी की धरा में नई खुशबू और मिठास घोल रही है। शेखावाटी में केसर की खेती की बात करना मजाक समझा जाता था, लेकिन केसर के जरिए किसानों की जिंदगी में नए रंग घोलने के लिए मोरारका फाउंडेशन आगे आया है।

फाउंडेशन के प्रयासों से आठ किसान प्रायोगिक तौर पर इसकी खेती करने लग गए है और यह खेती कुछ सफल भी होने लगी है। सबसे पहले चेलासी गांव के किसान मुरली धर सैनी ने इसकी खेती कर इसकी संभावना को मजबूती दी है। मोरारका हवेली में भी केसर की क्यारी तैयार की गई है। करीब नौ-दस में फूल भी खिले हैं। इन फूलों से केसर का उत्पादन होगा।

 

मोरारका फाउंडेशन के स्थानीय मैनेजर अनिल सैनी ने बताया कि कश्मीर से लाए प्रमाणित बीज से खेती शुरू की है गई। सर्दी का मौसम केसर की फसल के लिए सबसे उत्तम है। दिन में धूप खिलने और रात को सर्दी पड़ने से फूल ज्यादा आते हैं। केसर के फूलों को रात के अंधेरे में बंद कमरे में सुखाना पड़ता है। सुखाते समय भी फूलों की खास देखभाल करनी पड़ती है।

कृषि विभाग के अधिकारी इस बात का दावा करते हैं कि यहां पैदा होने वाली केसर की गुणवत्ता अच्छी नहीं हो सकती, क्योंकि श्रेष्ठ किस्म के लिए लम्बे समय तक शून्य से कम तापमान चाहिए। अनिल सैनी इस दावे को खारिज करते हैं। फिलहाल मोरारका हवेली, कल्याणपुरा के रामावतार बुगालिया, बलवंतपुरा फाटक के संजू सैनी, बड़ी झीगर के ओमप्रकाश पचार, बसावा के भानाराम सैनी, बलरिया का बास के नेमीचंद धायलों का बास के बलवीर सिंह केसर की खेती कर रहे हैं।

पायलट प्रोजेक्ट बनाकर सरकार के पास भेजा जाएगा

किसान केसर की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार से सहयोग मांग रहे हैं। पायलट प्रोजेक्ट बना सरकार के पास भेजा जाएगा। जैविक खेती करने वाले किसानों को शामिल किया जाएगा। सरकार की ओर से केसर के बीज खाद उपलब्ध कराई जाए तो इसकी खेती को बढ़ावा मिल सकता है।

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