चावल और मछली की एक साथ खेती से आप ले सकते है दोगुना लाभ

खेत में चावल और मछलियों का पालन एक साथ करें – ये सुनकर पहले तो आप भरोसा नहीं करेंगे। फिर जब भरोसा करेंगे तो मन में सवाल जरूर आएगा कि कैसे होता है ये, क्या है फायदा और कैसे मछलियां के पालन से चावल की फसल की लागत कम हो जाती है, जबकि उत्पादन कम नहीं होता।

भारत के पूर्वी राज्यों में साल 2010 के बाद धान के खेत से मुनाफा बढ़ाने के लिए एक नई तकनीक अपनाने की शुरूआत हुई थी वो है धान के खेत में मछली पालना। लेकिन ये तकनीक किसानों के बीच अभी ज्यादा मशहूर नहीं हो पाई है।

खेती की ये तकनीक कोई बहुत कठिन नहीं, करना बस इतना होता है कि धान के पानी भरे खेत में जल्दी बढ़ने वाली मछलियों के बीज डाल देने होते हैं। इससे धान की फसल के साथ ही मछलियां भी बाज़ार में बेचने को तैयार हो जाती हैं, यानि दोहरा मुनाफा।

देश के लगभग 04 करोड़ दस लाख हेक्टेयर ज़मीन पर धान की खेती होती है, लेकिन इसमें से धान के साथ मछली उत्पादन करने वाली तकनीक से एक लाख हेक्टेयर से भी कम हिस्सा ही प्रभावित हो पाया है। कारण यह है कि किसान इस विदेशी तकनीक को अच्छी तरह समझ नहीं पाते।

दरअसल इस तकनीक की शुरुआत चीन, फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे धान उत्पादक बड़े राज्यों से हुई थी। इन देशों के किसानों ने वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई इस तकनीक को हाथों हाथ लिया।

किसानों को चावल और मछली पालन के फायदे-

  • चावल-मछली की खेती से किसान मुख्य फसल के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकता है
  • धान(चावल) को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े को चावल-मछली की खेती नियंत्रित करता है
  • चावल-मछली की खेती फसल के फेल हो जाने के खतरे को कम करता है
  • चावल-मछली की खेती घास-फूस पर रोक लगाने में उपयोगी
  • चावल-मछली की खेती चावल की उपज को बढ़ाती है क्योंकि मछलियां मिट्टी के पोषक तत्वों को जगा देती हैं जो चावल की खेती के लिए सहायक होती है।

किसानों को चावल और मछली पालन के नुकसान-

  • चावल और मछली की खेती में नियंत्रित तरीके से कीटनाशक के इस्तेमाल की आवश्यकता होती है
  • सिर्फ धान(चावल) की खेती के मुलाबले इस एकीकृत चावल और मछली वाली व्यवस्था में ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है
  • इस व्यवस्था में चावल की पैदावार कम होती है क्योंकि जरूरी धान की फसल से करीब 45 सेमी नीचे क्यारियां(ट्रेन्चेज) बनाने की जरूरत पड़ती है, जिसकी वजह से धान की उपज का क्षेत्र कम हो जाता है, जिससे कम पैदावार होती है। क्यारियों की खुदाई की वजह से पानी को निकालने में परेशानी होती है।
  • सिर्फ चावल की खेती के मुकाबले धान के खेतों में मछली उत्पादन के कार्य के लिए ज्यादा निवेश की जरूरत पड़ सकती है।
  • सिर्फ धान की खेती के मुकाबले चावल और मछली की खेती में ज्यादा श्रम की आवश्यकता होती है।

चावल और मछली की खेती के लिए उपयुक्त जगह कौन सी है

  • धान के खेत में चावल और मछली की खेती के लिए जगह का चुनाव बेहद अहम भूमिका निभाता है।आप हर जगह पर इसकी खेती नहीं कर सकते
  • करीब 70 से 80 सेमी की बारिश की जरूरत होती है जो इस तरह की एकीकृत व्यवस्था के लिए आदर्श होता है।
  • चावल और मछली की खेती में उच्च पानी की वहन क्षमता और एक समान क्षेत्र वाली मिट्टी को प्रमुखता दी जाती है।
  • एकीकृत फसल व्यवस्था के लिए जगह के चुनाव में अच्छी पानी निकासी की व्यवस्था भी प्रमुख तत्वों में से एक है जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
  • जगह का चुनाव बाढ़ प्रभावित इलाके से हटकर होना चाहिए नहीं तो यहां की मछलियां निकल कर भाग सकती हैं।
  • एकीकृत चावल और मछली उत्पादन के लिये मछली का उपयुक्त प्रकार कौन सा है –

धान की तैयारी, चावल और मछली की खेती का प्रबंधन-

अगर आप धान की खेती के साथ मछली उत्पादन करना चाहते हैं तो पारंपरिक चावल के खेत में कुछ बदलाव करने होंगे, जैसे कि अच्छा मछली आश्रय और कटाई के क्षेत्र में बदलाव करने होंगे। इस तरह के धान के खेत के लिए गहरी खाइयां(ट्रेंचेज), नहर या हौज की जरूरत होती है। चावल के खेत में ये गहरी खाइयां अच्छी और सफल चावल-मछली खेती के लिए अच्छे मौके देती है। ज

ब पानी का स्तर कम हो, गलियारा में भोजन की तलाश, मछली इकट्ठा करने के आसान उपाय जब चावल के खेत सूखे हैं, ऐसे में यह सब काफी मददगार साबित होता है। जब बात चावल की प्रजाति की बात आती है तो धान और मछली की खेती में गहरी पानी की किस्म (प्रकार) सबसे बेहतर होता है।

गहरी खाइयां को 0.5 मीटर गहरा और कम से कम एक मीटर चौड़ा बनाया जाना चाहिए। इस बात को सुनिश्चित किया जाना चाहिए की गहरी खाइयां धान के पौधे से 10 मीटर के दायरे में हो। चावल की अच्छी पैदावार के लिए इस बात को सुनिश्चित करें कि गहरी खाइयां धान के क्षेत्र से 10 फीसदी से ज्यादा ना हो।

मछली के भंडारण के बाद 10 से 15 सेमी पानी की गहराई सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि मछली के जीवन को पक्का किया जा सके। चावल-मछली की खेती में दूसरी महत्वपूर्ण बात ये है कि खेत का पानी विषैले तत्वों (कीटनाशक पदार्थ) से दूर रहना चाहिए।