ये है अनार की सिंदूरी किसम,किसानो को कर रही है मालामाल

शेखावाटी के धोरों को सिन्दूरी अनार भा गया है। आबोहवा की अनुकूलता के कारण जिले में कई स्थानों पर सिन्दूरी अनार के पेड़ लहलहा रहे हंै। महज छह वर्षों में सीकर जिला प्रदेश में सिन्दूरी अनार के लिए प्रथम स्थान पर पहुंच गया है।

इसके साथ ही किसानों की तकदीर बदल गई है। इस समय जिले में करीब 1500 हैक्टेयर में सिन्दूरी अनार की खेती हो रही है। विशेषज्ञों की माने तो अगले दो वर्ष में सिन्दूरी अनार की खेती दो हजार हैक्टेयर में होने लगेगी।

तीन वर्ष में उत्पादन शुरू

राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत सीकर जिले में वर्ष 2008-09 में सिन्दूरी अनार की खेती शुरू हुई थी। सिन्दूरी अनार का पौधा तीन वर्ष में उपज देना शुरू कर देता है। सिन्दूरी अनार का बगीचा लगाने के लिए उद्यान विभाग की ओर से 30 हजार रुपए प्रति हैक्टेयर तक अनुदान दिया जाता है। अनार की अन्य किस्मो की बजाए सिन्दूरी अनार टिकाऊ, स्वादिष्ट व निर्यात योग्य होते हैं।

ऐसे होती है अनार की खेती

  • अनार के पौधों में लवण एवं क्षारीयता सहन करने की अच्छी क्षमता होती है। -6.5 से 7.5 पीएच मान, 900 ईसी/मिमी मृदा लवणता तथा 6.78 ईएसपी तक क्षारीयता वाली मिट्टी में भी इसकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है।
  • अनार की खेती के लिए गहरी बलुई दोमट भूमि सबसे उपयुक्त होती है, परन्तु क्षारीय भूमि में भी इसकी खेती की जा सकती है।
  • यही नहीं लवणीय पानी से सिंचाई करके भी अनार की अच्छी पैदावार ली जा सकती है।
  • शुष्क एवं अद्र्ध शुष्क क्षेत्र की जलवायु अनार उत्पादन के लिए अति उत्तम है।
  • फलों के विकास तथा पकने के समय गर्म एवं शुष्क जलवायु उपयुक्त होती है।
  • पूर्ण विकसित फलों में रंग तथा दानों में गहरा लाल रंग तथा मिठास के लिए अपेक्षाकृत कम तापमान की आवश्यकता होती है।
  • वातावरण तथा मृदा में नमी एवं तापमान में अत्यधिक उतार-चढ़ाव से फलों के फटने की समस्या बढ़ जाती है, जिससे उनकी गुणवत्ता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।

प्रदेश में होने लगे पौधे

सिन्दूरी अनार की किस्म मूलत: महाराष्ट्र इलाके की है। पौधे की मांग को देखते हुए उद्यान विभाग ने शुरुआती वर्षों में महाराष्ट्र के मालेगांव से सिन्दूरी अनार के पौधे मंगवाए। किसानों के रूझान को देखते हुए अब खेतों व सरकारी नर्सरियों में सिन्दूरी अनार की कलम से पौधे तैयार किए जाने लगे है।

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