अब जर्मन मशीन से खारा पानी को मीठा कर खारे पानी से होगी सिंचाई

खारेपानी के कारण फसलों का उत्पादन नहीं करने वाले किसानों के लिए ये लिए राहत की खबर है। अब जर्मन तकनीक की वाटर सॉफ्टनर मशीनों से खारे पानी को मीठा कर किसान आसानी से अब अपने खेतों में फसलों का उन्नत उत्पादन कर सकेंगे।

इसके लिए अठियासन रोड स्थित कृषि विज्ञान केंद्र पर लगाए गए वाटर सॉफ्टनर मशीन का प्रयोग सफल रहा है। अब केवीके वैज्ञानिक जिलेभर के किसानों को कृषि प्रशिक्षण के दौरान खारे पानी को मीठा कर फसल उपयोग के लिए जानकारी देंगे। केवीके की ट्यूबवैल पर स्थापित इस मशीन के माध्यम से 5 से 8 हजार टीडीएस तक काम करने का दावा किया जा रहा है।

ऐसे में जिल क्षेत्रों में खारे पानी के कारण किसानों के सामने फसल सिंचाई को लेकर रही परेशानी से भी किसानों को काफी हद तक निजात मिलने की संभावना है। वैज्ञानिकों की माने तो खारे पानी में जो साल्ट बोड रहता है, जिसे ये मशीन अलग कर देती है। ऐसे में ये तकनीक किसानों के लिए खारे पानी को मीठा करने में काफी कारगर साबित हो रही है।

^ केवीके की ट्यूबवैल पर लगाए वाटर सॉफ्टनर संयंत्र से खारे पानी को मीठा कर पहले मूंग बीच उत्पादन, अब बगीचे और 2 हैक्टेयर में जीरे के उत्पादन में पानी काम में लिया जा रहा है। किसानों को प्रशिक्षण, संगोष्ठी के दौरान इस तकनीक के बारे में बताएंगे।

पाइप लाइन चॉक होने देना, बालों का झड़ना, खाज-खुजली और स्कीन के रुखेपन को दूर करती है। बोरवैल का पानी इस्तेमाल करने वाले लोग भी इस मशीन का उपयोग कर सकते हैैं। डॉ.एसआर कुमावत, सहायक प्राध्यापक

जमीन की उतरी स्तर पर बनने वाली सफेद परत को कम करके, जमीन पर आनेवाली दरारों में सुधार, जमीन मुलायम होकर, उपजाऊ बनती हैं।

  •  फसल और पौधों में पत्ते जलने का प्रमाण कम होकर खेत में हरियाली बढ़ती हैं।
  • नमकीन/खारे पानी से बंद पड़ने वाले ड्रिपर्स और स्प्रिंकलर साफ होकर पहले जैसे काम करना शुरू कर देते है। केमिकल ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं पड़ती।
  • कंडिशनर से निकला पानी भौतिक रचना के अनुसार हलका होने से पौधे के जड़ों को आसानी से मिलता है।

कम पानी में अधिक उत्पादन ले सकते है।, यानी पानी की 20 से 30 प्रतिशत तक बचत होती है। फसल की जड़ों पर मूली पर बना नमकीन स्तर कंडिशनर से निकले पानी में घुलकर साफ हो जाता है। मूली की कार्यक्षमता बढ़कर फसल हरीभरी रहने में मदद मिलती हैं।

  • फसल और पौधों के उत्पादन में बढ़ोतरी होने के साथ पानी का पीएच विकसित होने के कारण फसल का उपयुक्त मूल द्रव्य मिलते है।
  • तीव्र विद्युत लहरी के कारण विषाणु का प्रमाण
  • पानी का कम होकर जैविक दृष्टि से पानी शुद्ध होता हैं।

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