इस साल कम हुई मध्य प्रदेश में सोयाबीन की पैदावार, ये हैं वजहें

एक समय मध्यप्रदेश को सोया राज्य का दर्जा हासिल था और देश का 88 फीसदी सोयाबीन मध्य प्रदेश में पैदा होता था. लेकिन अब धीरे धीरे किसानों का रुझान सोयाबीन से हटता जा रहा है.

सोयाबीन की फसल में लागत का अधिक होना, बारिश की कमी और फसल में कचरे की अधिकता ने सोयाबीन लगाने वाले किसानों की कमर तोड़ दी और इसी कारण अब सोया किसान दूसरी फसलों के प्रति आकृषित हो रहे हैं.

रायसेन जिले में भी सोयाबीन के रकबे में काफी कमी आई हैं. कुछ वर्षों पहले तक जिले में लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की फसल बोई जाती थी लेकिन इस वर्ष मात्र 90 हज़ार हेक्टेयर क्षेत्र में ही सोयाबीन की फसल का लक्ष्य कृषि विभाग द्वारा रखा गया है.

सोयाबीन बोने वाले किसानों का भी कहना है कि उन्होने इस वर्ष कम रकबे में सोयाबीन बोई है और यदि इस वर्ष अच्छी पैदावार नही हुई तो अगले साल से इसे बंद कर देंगे.

कृषि विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि सोयाबीन के बीजों की खराब क्वालिटी के कारण इस वर्ष कई किसानों ने सोयाबीन नही बोई है. अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि सोयाबीन में अगले वर्ष अधिक संख्या में किसान रुचि दिखाएंगे.

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