पशु खरीदने जा रहे हैं तो रखें इन बातों का ध्यान ,नहीं तो हो सकते है ठगी का शिकार

ज्यादातर पशुपालक दूसरे राज्यों से महंगी कीमत पर दुधारू पशु तो खरीद लेते हैं। लेकिन बाद में पता चलता है कि दूध का उत्पादन उतना नहीं हो रहा जितना बिचौलिए या व्यापारी ने बताया था और कई बार पशु को कोई गंभीर बीमारी होती है जो कभी ठीक नहीं हो सकती ऐसे में पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी होता है।

ऐसे में आप निचे दी हुई बातों का ध्यान रख कर ठगी से बच सकते है और आपको सही नस्ल का पशु चुनने में भी आसानी होगी

शारीरिक बनावट : अच्छे दुधारू पशु का शरीर आगे से पतला और पीछे से चौड़ा होता है। उस के नथुने खुले हुए और जबड़े मजबूत होते हैं। उस की आंखें उभरी हुई, पूंछ लंबी और त्वचा चिकनी व पतली होती है। छाती का हिस्सा विकसित और पीठ चौड़ी होती है। दुधारू पशु की जांघ पतली और चौरस होती है और गर्दन पतली होती है। उस के चारों थन एकसमान लंबे, मोटे और बराबर दूरी पर होते हैं।

दूध उत्पादन कूवत : बाजार में दुधारू पशु की कीमत उस के दूध देने की कूवत के हिसाब से ही तय होती है, इसलिए उसे खरीदने से पहले 2-3 दिनों तक उसे खुद दुह कर देख लेना चाहिए. दुहते समय दूध की धार सीधी गिरनी चाहिए और दुहने के बाद थनों को सिकुड़ जाना चाहिए।

आयु : आमतौर पर पशुओं की बच्चा पैदा करने की क्षमता 10-12 साल की आयु के बाद खत्म हो जाती है। तीसरा चौथा बच्चा होने तक पशुओं के दूध देने की कूवत चरम पर होती है, जो धीरे धीरे घटती जाती है। दूध का कारोबार करने के लिए 2-3 दांत वाले कम आयु के पशु खरीदना काफी फायदेमंद होता है। पशुओं की उम्र का पता उन के दांतों की बनावट और संख्या को देख कर चल जाता है। 2 साल की उम्र के पशु में ऊपर नीचे मिला कर सामने के 8 स्थायी और 8 अस्थायी दांत होते हैं। 5 साल की उम्र में ऊपर और नीचे मिला कर 16 स्थायी और 16 अस्थायी दांत होते हैं। 6 साल से ऊपर की आयु वाले पशु में 32 स्थायी और 20 अस्थायी दांत होते हैं।

वंशावली : पशुओं की वंशावली का पता लगने से उन की नस्ल और दूध उत्पादन कूवत की सही परख हो सकती है। हमारे देश में पशुओं की वंशावली का रिकार्ड रखने का चलन नहीं है, पर बढि़या डेरी फार्म से पशु खरीदने पर उस की वंशावली का पता चल सकता है।

प्रजनन : सही दुधारू गाय या भैंस वही होती है, जो हर साल 1 बच्चा देती है। इसलिए पशु खरीदते समय उस का प्रजनन रिकार्ड जान लेना जरूरी है। प्रजनन रिकार्ड ठीक नहीं होने, बीमार और कमजोर होने से पाल नहीं खाने, गर्भपात होने, स्वस्थ बच्चा नहीं जनने, प्रसव में दिक्कतें होने जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं।

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