क्यों किया जा रहा है गाय के पेट में सुराख ?

गाय की सर्जरी कर उसके पेट में सुराख किया जाता है। इस सुराख को एक प्लास्टिक की रिंग द्वारा बंद किया जाता है। इसमें एक ढक्कन का प्रयोग भी होता है, जो इस छेद को बंद करने के काम आता है। इस सर्जरी के बाद गाय को सामान्य स्थिति में लौटने के लिए महीने भर का समय लगता है।

इन गायों को fistulated गाय कहा जाता है। इनके पेट में जो माइक्रोब्स होते हैं, उन्हें किसी अन्य जानवर में ट्रान्सफर किया जा सकता है। लेकिन आखिर ऐसा करने की वजह क्या है, आइए जानते हैं?

सबसे हैरानी वाली बात यह है कि गाय इस पर बिलकुल सामान्य रहती है। विचलित नहीं होती। यदि उसके पेट में कोई बैक्टीरिया है भी तो इस छेद द्वारा उसका आसानी से पता लगाया जा सकता है।

छेद करने का मुख्य कारण यह है कि वैज्ञानिकों को इस छेद द्वारा जांच में सहायता मिलती है। वे गाय के अंदरूनी हिस्से की जांच आसानी से कर सकते हैं। जबकि पहले ये बहुत कठिन हुआ करता था। और भी हैं कई फायदे, आइये जानते हैं।

गाय के लिए उचित भोजन की जानकारी के लिए यह छेद सहायक है। इस छेद द्वारा यह देखा जाता है कि गाय को कौन-सा खाना पच रहा है और कौन सा उसके लिए हानिकारक है। इसके बाद गाय पूरी तरह से स्वस्थ हो जाती है।

इस छेद का एक सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि गाय को होने वाली बीमारियों का सटीकता के साथ पता चल जाता है। इस छेद की सहायता से गाय के स्वास्थ्य की जानकारी भी आसानी से हो जाती है।

गाय के पेट का निरिक्षण कर सीधे पेट में दवाई भी दी जा सकती है। यहाँ तक कि गाय के पेट में हाथ डालकर उसे वेटरनरी डॉक्टर खुद साफ भी कर लेते हैं।

आप शायद हैरान होंगे लेकिन यह छेद गाय की उम्र बढ़ाने में सहायक नज़र आ रहा है। कुछ लोग इसे गाय के साथ क्रूरता का नाम दे रहे हैं, जिससे लड़ने का कोई क़ानून नहीं है।

आलोचकों का कहना है कि गाय के पेट का एक हिस्सा काटकर अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। साथ ही यह खेती के काम आने वाला जीव है, इस वजह से इस पर आविष्कार का कानूनी विरोध नहीं किया जा रहा है, जो कि पूर्ण रूप से गलत है।

इस पद्धति का इस्तेमाल केवल अमेरिका में ही किया जाता है। इसे भारत में अभी नहीं लाया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पद्धति से कई सकारात्मक चीजें सामने आई हैं।

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