बासमती की रोपाई करते समय किसान रखें इन बातों का ध्यान, होगी अच्छी पैदावार

पीआर धान की रोपाई हो चुकी है। अब किसान बासमती की रोपाई में लगे हैं। जिसकी किसान वैज्ञानिक तरीके से रोपाई कर अच्छी आमदन ले सकते हैं। चौ. चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय करनाल के रिजनल डायरेक्टर डाॅ. धर्मबीर सिंह यादव ने बताया कि प्रदेश में अच्छी बरसात हो रही है जो धान लग चुकी है उसमें अच्छी ग्रोथ होगी।

ऐसे में बासमती धान की रोपाई में लगे किसानाें को सावधानी बरतने की जरूरत है। किसान प्रति एक वर्ग मीटर में 33 पौधों की रोपाई करें, इससे अच्छी पैदावार होगी। आमतौर पर किसान प्रति एक वर्ग मीटर में 15 से 18 पौधों की रोपाई करता है। इसके बाद बढ़वार के चक्कर में किसान जरूरत से ज्यादा यूरिया खाद डालते हैं, इससे बीमारी आने का ज्यादा खतरा रहता है। कीड़े वाली बीमारी आ जाती है।

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ज्यादा गहराई में न करें रोपाई, पौध को ग्रोथ करने में लगता है समय

किसान पाड़े काटने के तुरंत बाद धान की रोपाई कर देते हैं, इससे रोपाई गहराई में हो जाती है। पौध को नई जड़े बनाने में समय लग जाता है। किसान पाड़े काटने के एक दिन बाद रोपाई करें। इससे जड़े ज्यादा गहराई में नहीं जाएगी। धान की जल्दी ग्रोथ होती है। रोपाई से पहले पौध भी गीले में उखाड़े। इससे बासमती धान में बकानी रोग नहीं आएगा।

बेवजह न डाले कोई भी दवा: किसान बिना जरूरत के फुटाव और बीमारियों से बचाव की दवाइयां डाल देते हैं, किसानों को ऐसा नहीं करना चाहिए। वैज्ञानिकों की सलाह के बाद ही दवाई डालें।

जिंक की कमी दूर करने के लिए करें यूरिया का छिड़काव: धान में जिंक की कमी आ जाती है। पत्तों पर जंग जैसे धब्बे लग जाते हैं। इसके लिए 100 लीटर पानी में 500 ग्राम जिंक सल्फेट और डेढ़ किलोग्राम यूरिया मिलाकर छिड़काव करें।

धान की सीधी बिजाई में करें दवा का छिड़काव: जिन किसानों ने धान की सीधी बिजाई की हुई है। उसमें मिश्रित खरपतवार की पहचान के लिए विशेषज्ञों की सलाह लें दवाई का प्रयोग करें। सीधी बिजाई में आमतौर पर लोहे की कमी हो जाती है। इससे नए पत्ते पीले और सफेद हो जाते हैं। ऐसे में 500 ग्राम सल्फेट फैरस का स्प्रे करें।