फसलों में नदीनों की रोकथाम के लिए सही समय पर करें स्प्रे, स्प्रे की तकनीक पर ध्यान देना भी जरूरी

अक्सर गेहूं की फसल में खरपतवारों का होना किसानों की सिरदर्दी का कारण बनता है। समय रहते खरपतवारों पर नियंत्रण न किया जाए तो उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पडना लाजमी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि खरपतवारों के नियंत्रण के लिए दवा के चुनाव के साथ स्प्रे की तकनीकों पर ध्यान दिया जाना भी जरूरी है। किसानों को चाहिए कि वे इन सब बातों का ध्यान रखें, तभी उनको फायदा मिल सकेगा।

मंडूसी सबसे बडा सिर-दर्द

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भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल के शस्य विज्ञान के प्रधान वैज्ञानिक राजेंद्र सिंह छोकर का कहना है कि गेहूं की फसल में किसानों के लिए मंडूसी नामक खरपतरवार सबसे बडा सिर-दर्द है। अगर समय रहते मंडूसी पर काबू न पाया जाए तो किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ता है।

किसानों को चाहिए कि वे अपने गेहूं की फसल में बिजाई के 21 दिन बाद पहला पानी देने का प्रयास करें, ताकि सही समय पर खेत में दवाओं का छिडकाव किया जाना संभव हो। देरी से दवाओं का छिडकाव करने से मंडूसी का पौधा ज्यादा दिन का होने पर दवाओं का सही असर नहीं होता है। जिसके चलते किसान मंडूसी पर नियंत्रण के लिए बार-बार स्प्रे करते हैं जो कि गेहूं की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव के साथ किसानों की जेब पर अतिरिक्त भार डालता है।

बेहतर परिणाम के लिए बरतें सावधानियां

डॉ. छोकर की किसानों को सलाह है कि वे पहली सिंचाई के बाद खेत के बत्तर आने पर छिड़काव शुरू करेंे। किसान दवाओं का बदल-बदल कर इस्तेमाल करें। जिन किसानों ने मंडुसी की रोकथाम के लिए पिछले साल क्लोडिनाफॅाप या फिनोक्साडेन नामक ग्रुप की दवाओं का इस्तेमाल किया था वे इस साल सल्फोस्लफयूरोन ग्रुप की दवाओं के छिड़काव को प्राथमिकता देंे।

इसी तरह सल्फोस्लफयूरोन ग्रुप का इस्तेमाल करने वाले वर्तमान में क्लोडिनाफॅाप या फिनोक्साडेन नामक ग्रुप की दवाओं का प्रयोग करें। दो ग्रुप की दवाओं को मिलाकर स्प्रे करना फायदेमंद नहीं होगा। इसके अलावा चौड़े पत्ते वाले खरपतवार रोकने वाले शाकनाशियों को मंडूसी वाले शाकनाशी के साथ मिलाकर करने से परहेज बरतें। क्लोडिनाफोप ग्रुप के साथ चौड़े पत्ते को रोकने वाली दवा एलग्रिप आदि को मिलाकर करने की बजाए दो-तीन दिन बाद करना बेहतर होगा।

स्प्रे करते समय साफ व ताजे पानी का प्रयोग करें। किसानों को चाहिए कि वे एक नोजल पंप की जगह बूम नाजल वाले स्प्रे पंप कर इस्तेमाल करें। इससे दवाओं का छिड़काव बेहतर तरीके से होगा एवं ज्यादा एरिया एक साथ कॅवर करने से छिड़काव करने के समय की बचत होगी। स्प्रे का मिश्रण बनाते समय दवा की तय मात्रा का ही प्रयोग करें। नैप सैक स्प्रे पंप प्रति एकड 8-10 टंकी अवश्य करें। छिड़काव करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कोई भी जगह स्प्रे बिना न रहे एवं किसी भी जगह पर दवा का दोहरा स्प्रे न हो

जोकि गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। छिड़काव खेत में पड़ी औस सूखने उपरांत करने का प्रयास करें। खेत में छिड़काव करते समय नोजल रूकने पर तार या अन्य नुकीली चीज से साफ न करें बल्कि साफ पानी से धोकर प्रयोग लाएं। नुकीली वस्तु नोजल के सुराख के आकार को बदल सकती है। किसान ट्रैक्टर मांउटेड बूम स्प्रेयर का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन सेल्फ मांउटेड रेन गन एवं मिस्ट ब्लो से छिड़काव न करें।